विधवा मकान मालकिन की चूत में लंड

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सन 2009 की बात है तब मैं जयपुर मैं नया नया ट्रांसफर ले के गया था. बेंक की नौकरी में यह मेरा तीसरा ट्रांसफर था और मैं इस से तंग आ चूका था. जयपुर स्टेशन के करीब ही कुछ दिन एक सस्ते होटल में दिन गुजारने के बाद मैंने होटल के ही एक वेटर की मदद से एक किराये का कमरा ले लिया. यह मकान एक विधवा औरत का था जिसका नाम सुषमा था, मेरी कहानी सुषमा की चूत में लंड देने की ही है.

सुषमा वैसे तो ठीक थी लेकिन किराया वसूलने ने में वह बहुत अकडू थी और महिना ख़तम होते ही वह रूम में आ जाती थी. उसकी दो बेटिया थी सुमन और नेहा. सुमन कुछ 14 की थी और नेहा केवल 11 की थी. सुषमा भी भरी जवानी में ही विधवा हो गई थी उसकी उम्र मुश्किल से 35 की होगी. वह गोरी और भरी हुई काया की मालिकिन थी. मैं उसके लिए दिल में कोई बुरा ख़याल नहीं रखता था लेकिन एक दोपहर जो हुआ वह मेरे लंड को उठाने के लिए काफी था.दोपहर को मेरा लंड खड़ा हो गया सुषमा को ऐसे देख बेंक होलीडे होने की वजह से मेरी छुट्टी थी और मैंने दोपहर के करीब 1 बजे तक सोया हुआ था. उठ कर मैंने आज मूवी देखने जाने का इरादा बनाया था 3 से 6 के शो में. मैं उठा और टॉयलेट में गया, अभी हगना आधा ही हुआ था की मुझे बाथरूम से आह आह ओह ओह आह…ऐसी आवाजे आ रही थी. सुषमा के घर में बाथरूम और टॉयलेट के बिच एक इंट का छेद बना था जिसे यह लोगो ने मोटे कागज से ढँका हुआ था लेकिन अगर कागज को थोडा सरकाया जाए तो झाँका जरुर जा सकता था. मैंने उत्सुकतावश कागज थोडा खोला और अंदर देखा की सुषमा बाथरूम में खड़ी हुई थी और उसके चूत का भाग मेरे सामने था. उसने अपनी चूत के अंदर एक लाल रबर का डिल्डो लिया हुआ था जिसे वह अपनी दो ऊँगली से चूत के अंदर बहार कर रही थी. मेरा लंड वही खड़ा हो गया, वैसे भी लंड को चूत की खुराक मिले काफी दिन हो गए थे. सुषमा को यह हालत में देख मेरे जहन में उसका सेक्सी बदन अब आँखों के सामने आने लगा, वो बदन जिसे मैं कितने दिनों से नजरअंदाज किए था. सुषमा जैसे मैं कहाँ मुश्किल से 35 की लगती थी. उसके चुंचे भारी और लम्बे काले बाल थे. उसका आवाज भी मस्त पतला था, बिलकुल उसकी कमर की तरह….मेरा लंड अब इस विधवा की चूत पाने को बेकरार होने लगा था. मैंने एक बार और अंदर देखा और सुषमा की चूत के अंदर वही डिल्डो की आवनजावन लगी हुई थी साथ ही में सुषमा आह आह आह करती जा रही थी.
मैंने आइडिया लगाया इस चूत में लंड देने के लिए

मैंने सुषमा को अपनी हाजिरी का अहेसास देने के लिए जोर से खांसी खाना चालू कर दिया, टॉयलेट के अंदर ही. आह आह बंध हुई और मुझे पीता चल गया की सुषमा समझ गयी की मैं उसे सुन चूका हूँ. मैं हग के बहार आया और मैंने बेसिन में खड़े खड़े ब्रश कर लिया. तभी सुषमा अपने चुन्चो के उपर टॉवेल लपेट के बहार आई, उसके सेक्सी चुंचे मस्त दिख रहे थे टॉवेल की धार के उपर से. मुझे देख के वह शर्मा के जा रही थी. आज पहेली बार वह मुझे सहमी हुई लगी थी वरना तो वो हमेशा बिंदास्त रहेती थी. मैं मनोमन सोच रहा था की यह आज लंड ले ले तो बहुत मजा आ जाये क्यूंकि वह खुद भी आज मस्त गरम थी. मैं मनोमन उसे चोदने के रास्ते सोच रहा था तभी चमत्कार हो गया. सुषमा मेरे लिए चाय ले के आई थी, उसने मुझे चाय देते हुए कहा, “आज आपकी छुट्टी है क्या…अच्छा हाँ नेहा लोगो की भी आज छुट्टी है तो आप की भी होनी ही थी….मुझे पता ही नहीं था की आप घर पे हैं.”
मैंने बिना मौका गवाँए कहा, “तभी आप बाथरूम में जोर जोर से चीख रहे थे, कुछ दुविधा है तो मुझे बता सकती है आप.”
सुषमा सन्न रह गई और वो मेरे से नजर नहीं मिला पा रही थी, मैंने फट से चाय ख़तम की और उसे कहा “आइये, मेरे कमरे में बैठते है….!”
सुषमा बोली, “मैं बाल सुखा के आती हूँ.”
मैंने कहा, “रहने दीजिए आप भीगे बालों में बहुत सेक्सी लग रही है….!”

सुषमा हंसी दबाने की लाख कोशिश भले कर रही हों मुझे उसके होंठो के कोने में मुस्कान दिख ही गई. रूम में आते ही वोह पलंग के उपर बैठ गई. मैं अभी सारा सामान नहीं लाया था जयपुर इसलिए बैठने के लिए वैसे भी रूम में और कोई चीज थी नहीं. मैंने उससे नजरे मिलाते हुए उसे कहा, “मैं आपकी दुविधा वैसे बाथरूम में देख ली हैं, मैं आपका फायदा नहीं उठाना चाहता लेकिन आपके दर्द को अगर आप चाहे तो बाँट जरुर सकता हूँ.”
सुषमा कुछ बोली नहीं और मैं समझ गया की यह ख़ामोशी का मतलब जरुर हाँ ही है. फिर भी मैं एकाद मिनिट इस सन्नाटे को झेलता रहा, इधर लंड के बारा नहीं चौदा बजे हुए थे और मुश्किल से वह पेंट में बैठा था. सुषमा की आँखे थोड़ी ऊँची हुई औ उसने मेरी आँखों से अपनी आँखे मिला दी. उसके आँख मुझे जैसे की बुला रही थी के आ जाओ और अपना लंड मेरी चूत के अंदर डाल दो. मैंने उसके बालो में हाथ फेरा और वह आँखे बंध करने लगी. वह अभी भी वही टॉवेल में थी. मैंने उसके मस्त स्तन के उपर हाथ रख दिया और उन्हें दबाने लगा. सुषमा अह आह ऐसे बोल रही थी. मैंने एकाद मिनिट तक स्तन को दबाये और फिर टॉवेल के मोड़ को पकड के खोल दिया. सुषमा ने इस लम्बे टॉवेल के अंदर ही अपनी जवानी को लपेटा था, अंदर ना ब्रा थी ना पेंटी और ना दूसरा कुछ. मेरा लंड फडफड हो उठा. सुषमा की चूत मस्त लाल रंग की थी और अभी उसके उपर कोई बाल नहीं था. शायद उसने आज ही शेव की थी. मैं निचे बैठा उसकी दोनों टांगो के बिच और उसकी एक टांग मैंने उठा के अपने कंधे पर रख दी. मेरी जीभ तुरंत इस हसीन चूत को छूने लगी जिसका नमकीन स्वाद मुझे महेसुस होने लगा. सुषमा आह आह कर रही थी और उसकी जीभ उसके गुलाबी होंठो पर घूम रही थी. मैं भी पूरी जीभ उसकी चूत के अंदर डाल उसे स्वर्गीय अनुभूति करवा रहा था.
सुषमा की चूत तुरंत ही झड़ गई

मैंने जीभ को पूरा चूत के अंदर घुसाया हुआ था और मैं अंदर उसे इधर उधर फेर रहा था. सुषमा मेरे माथे को अपने हाथ से दबा रही थी. मैंने अपनी पेंट की बक्कल खोली और लंड को खुली हवा में आजाद किया. मेरा लंड एकदम टाईट हो चूका था और उसे चूत का सहारा चाहिए था.तभी सुषमा के शरीर को झटके लगे और वह मेरा माथा और भी जोरों से चूत पर दबाने लगी. मुझे समझ आ गया की वह झड चुकी थी. सुषमा खड़ी हुई और उसने मुझे हाथ पकड के पलंग पर बिठा दिया. अब चूसने की बारी उसकी आई थी जैसे की क्यूंकि उसने मेरे लंड को टॉवेल से पोंछ के सीधा मुहं में भर लिया. वह कोई केन्डी चूस रही हो इस तरह टाईट पकड के लंड चुस्ती गई. मेरा लंड दो मिनिट में ही उसके मुहं में वीर्य का एक समुद्र भरने लगा. सुषमा खड़ी हुई और उसे वीर्य वही खिड़की से निचे थूक दिया. मेरी सारी उत्तेजना जैसे की दब गई हो, लंड भी सिकुड़ने लगा था. सुषमा मेरे उपर लेट गई और उसके ठंडे ठंडे बदन से मुझे मजा आ रहा था.
लंड चूत में जा के खुश हो गया

दो मिनिट के बाद सुषमा के हाथ मेरे लंड को सहलाने लगे और लंड फिर से तन गया. मैंने अपनी ऊँगली सुषमा की चूत के अंदर कर दी और मैं ऊँगली को तेज चलाके उसे फिंगर फक करने लगा. सुषमा लौड़े को और भी तेज चलाने लगी और थोड़ी देर में मेरा लंड फिर से वही लम्बाई में आ गया. सुषमा अब पलंग के अंदर अपनी टाँगे फैला के सो गई. उसकी मस्त मुलायम चूत के गुलाबी होंठ के उपर मैंने लौड़ा रख दिया और फिर धीमे से एक हलका झटका दिया, एक आह आह हुई और चूत लंड से भर गई. सुषमा हिलने लगी और मैं भी उसकी पतली कमर पकड उसे झटके देने लगा. लंड की गर्मी शायद सुषमा को बहुत दिनों के बाद नसीब हुई थी क्यूंकि वह बहुत रसपूर्वक चुदाई में व्यस्त थी. मैंने उसके स्तन दबाये और साथ ही उसके होंठो को भी चूमना चालू कर दिया.सुषमा बिच बिच में अपनी चूत को अकड लेती थी जिस से लंड को बहुत मजा आता था. मैंने सुषमा को कुछ 7-8 मिनिट मस्त चोदा और फिर लंड से वीर्य निकलने ही वाला था की मैंने लंड बहार क्र दिया.

सुषमा अपने स्तन के बिच मेरा लंड रगड़ने लगी और मैं झटके दे के उसके स्तन को चोदने लगा, वीर्य का फव्वारा स्तन के उपर निकला और जैसे की स्तन के उपर गाढ़ी मलाई निकल गई हो. सुषमा और मैं साथ में नहाने के लिए चले गए. जयपुर 2011 ऑगस्ट तक रहा और सुषमा से मेरे सबंध बहुत मधुर हो गए थे, केवल एक बार गर्भ रहे गया तब वोह थोड़ी बौखला गई थी लेकिन मैंने उसे दवाईया ला के दे दी जिस से वह फिर नार्मल हो गई. मैंने तो इस सेक्सी विधवा को शादी का प्रस्ताव भी दिया लेकिन समाज के डर से वह आगे नहीं आई..लेकिन मैंने अपने लंड से उसकी चूत की भूख शांत कर के कुछ पूण्य जरुर कमा लिया……मित्रो आपको यह स्टोरी कैसी लगी हमें यह जरुर कमेन्ट में लिख भेजे…….अगली स्टोरी तक के लिए हमारी तरफ से बाय बाय.


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