Train mein Ladki ke sath Sex

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यु तो मैं अपने कॉलेज के दिनों से ही ट्रेन में घूम रहा हु पर पहले की बात अलग थी और अब की बात अलग है। पहले मैं ट्रेन में जाने के लिए उत्शहित रहता था और अब मुझे ट्रेन में जाना काम पसंद लगाने लगा। पर एक बार जैम मैं चेन्नई से मुंबई के लिए ट्रेन पकड़ा तो मेरे मन में एहि चल रहा था की पता नहीं आखिर काम ये ट्रेन मुझे मुंबई पहुचायेगी। सोचते सोचते मेरी नज़र ट्रेन में बैठी एक खूबसूरत लड़की पर पड़ी। वो टाइट जींस और टॉप पहने एक पत्रिका पढ़ रही थी। वो पत्रिका में काफी ज्यादा ध्यान दे रही थी और मौका पते ही मैं उसके ख़ूबसूरत फिगर को निहारने लगा था। मन तो कई बार ऐसा कर रहा था की उससे दोस्ती करलु ताकि सफर अच्छे से काट जाए।

Train mein Ladki ke sath Sex

मैंने उस ख़ूबसूरत लड़की को काफी देर तक देखा और फिर सोने के लिए मैं अपनी सीट पर चला गया। सीट से लेट कर भी मैं उस लड़की के सारे अंगो को निहार रहा था। बेहद ख़ूबसूरत लग रही थी वो. उसकी टाइट टॉप में उसके बड़े-बड़े अंग मुझे काफी अच्छे लग रहे थे। फिर क्या था मैं अब लेते लेते उसके अंगों को देख कर अपना सफर तय करने लगा।
थोड़ी देर बाद वो उठी और ठीक मेरे सामने वाली सीट पर अपना बिस्तर डालकर सोने लगी। अब तो मेरी नियत भी ख़राब होने लगी की काश वो खूबसूरत लड़की कुछ बाते ही करले। इतने में उसने मुझे ही आवाज़ लगाई “कही मेरी चादर आपके पास तो नहीं चली आई ” बेहद ख़ूबसूरत आवाज़ थी उसकी। मई तो भूल ही गया की उसने मुझसे कुछ माँगा और मैं उसकी ओर देखते हुवे भी उसकी बात को नहीं सुन पाया।
वो फिर से बोली और तब मुझे होश आया की वो मुझसे कुछ पूछ रही है। मैंने फिर अपनी सीट से अपना ही चादर उसे देदिया। रात भर मैंने तो जैसे तय किया था की उसे ही देखता रहूँगा सो मैं देखते हुवे सोने लगा। उसके कपड़े इतने टाइट थे कि मैं बस उसे देखता ही रहा।
देखते ही देखते काफी रात हो गयी और अब मुझे नींद भी आ गयी थी तभी अचानक वो खूबसूरत लड़की मेरे पास आई और उठा कर मुझसे बोली की वो जरा बाथरूम होकर आती है और मैं उसका सामान देखता राहु। सामान तो मैं देखना ही चाहता था पर किसी और तरीके का।
मैं नींद से अब जाग चूका था शायद इस उम्मीद में की इस ख़ूबसूरत लड़की से अब बात करने का मौका मिलजाए। वो जैसे ही आई मैंने उससे ढबाक पूछ लिया की वो कहा जाने वाली है। पता चला की वो भी मेरी तरह मुंबई ही उतरने वाली है। फिर वो सोने लगी।

मेरे मन में और बाते आने लगी की इससे बात करू ताकि वो भी दिलचस्पी दिखा सके मुझसे बात करने में। मैंने ऐसे ही उससे पूछ लिया कि क्या उसे नींद आरही है? इस बात पर उसे हसी आगयी और मैं तो लड़कियों को समझने वाला बादशाह था जिसे मालूम था की किसी हँसने वाली लड़की को कैसे फ़साना है। फिर मैंने उससे बात करना सुरु कर दिया।
हमारी बाते धीरे-धीरे लम्बी खिचती गयी और हमें पता भी नहीं चला की सुबह कब हुई। सुबह को देखने के बाद भी हम दोनों जैसे सोना ही नहीं चाहते थे। वो भी मुझसे बात करती रही और मैं भी मजे लेता रहा। धीरे-धीरे हम एक दूसरे के करीब आने लगे जहा हमने एक दूसरे के लुक के ऊपर भी बात करना सुरु कर दिया। ये वाकई एक ऐसा मोड़ था जिसमे मुझे उसके टाइट कपड़ो के बारे में बोलने का मौका मिला।
मैंने उससे कहा की मुझे उसके स्तन इन टाइट कपड़ो से अच्छे लगते है तब उसने मुझे हस्ते हुवे बोला की मैं उनके साथ खेल सकता हु। मैंने हामी भी भर दी और फिर बोला आपही कुछ ऐसी तयारी करे जिससे हमें मौका मिल सके एक दूसरे के साथ खेलने का। उसने मुझे थोड़ी देर बाद बाथरूम आने के लिए कहा और वो वह से बाथरूम की ओर चली गयी।
मैं उसे देखता रहा और जैसे ही वो बाथरूम के अंदर गयी मैं उसकी ओर कदम बढ़ाना सुरु कर दिया। जैसे ही मैं वह पहुंचा मैंने देखा कि एक आदमी अपना चेहरा धो रहा है तो मैं वही खड़ा होगया और फ़ोन पर बात करने का नाटक करने लगा। जैसे ही वो आदमी वह से गया मैं सीधा उस बाथरूम में घुसगया जहा मैंने उसे घुसते हुवे देखा था।


मैं जैसे ही अंदर आया मैंने पाया की वो टाइट कपड़ो वाली के सारे कपडे निकले हुवे थे और उसके स्तन मेरी नज़रो के सामने थे। फिर क्या था मैंने अच्छा फायदा उठाया उसकी जवानी का और उसने मुझसे भी काफी मजे लिए। बाथरूम में हम करीब पंद्रह बीस मिनट तक एक दूसरे के साथ खेल खेलते रहे और फिर हम मौका देख कर एक एक करके बाहर आये।
जब हम अपनी सीट पर वापस आये तो हमें बड़े ज़ोरो की नींद आने लगी थी। हमें यह भी थोड़ा डर था की कही हम अपनी मंज़िल पर नहीं उत्तर पाये क्यूंकि उसे ठाणे उतारना था और मुझे दादर। कोसिस करने के बाद भी न तो वो सोने से खुद को रोक पायी और न मैं।
जब मेरी नींद खुली तो मैंने पाया की ट्रेन दादर आ चुकी थी और वो खूबसूरत लड़की दूर दूर तक नहीं दिखाई दे रही थी। मेरा मन काफी उदास हो गया क्यूंकि मैंने न तो उसका फ़ोन नंबर लिया और न ही कई ऐसी बात हुई जिससे मई उसे कही ढूंढ भी सकु। मेरे पास कुछ रह गया था तो वो था उसका नाम जोकि मैं ट्रेन की चार्ट से ही जाना। नाम भी ऐसा था उसका की किसी भी जगह उसे धून्डो तो हजारो लडकिया उस नाम की मिल जाये।
खैर जो भी था जैसा भी था मुझे वो बिता पल हमेशा याद रहेगा क्यूंकि उस जैसी बिंदास खूबसूरत लड़की को पाना बेहद मुश्किल काम है और मैंने तो उसके लिए मन में काफी साड़ी बाते भी सोच राखी थी। मैंने उसे बाद में ठाणे स्टेशन और आस पास कई बार देखने की कोसिस की पर कोई कामयाबी नहि मिली।