jannat ki sair

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मुझे सेक्स के बारे में बहुत ज्यादा जानकारी नहीं थी मगर मेरी एक बहन थी वो मुझसे उमर में 6 साल बड़ी थी। हम लोग अक्सर टीवी देखते वक़्त अपनी पसंद का चैनल देखने के लिए झगड़ते थे। तब वो रिमोट को अपने पास जबरदस्ती छुपा देती थी। वो रिमोट को अपने बूब्स के ऊपर दबा के रख लेती थी और मुझे चिढाती थी। तब मैं गुस्से में रिमोट लेने के लिए जाता तो वो रिमोट लेने के लिए बढ़े मेरे हाथों को अपने हाथों से बूब्स को दबवाती थी और फ़िर धीरे धीरे मुझे अपने साथ बिस्तर पर ले जाकर मुझे लिटा देती थी। वो धीरे धीरे मेरा हाथ अपने कुरते के अन्दर ले जाकर अपने बूब्स दबवाती थी।

इस तरह अक्सर हमारे बीच में होता रहता था। जैसे जैसे वक़्त बीतने लगा, ऐसा होने पर मुझे कुछ कुछ होने लगता था और धीरे धीरे मुझे पता लगने लगा कि मेरे साथ क्या हो रहा है। मुझे सेक्स के बारे में जानकारी होने लगी। फ़िर मैं जान बूझ कर टीवी देखते वक़्त अपनी बहन के साथ झगड़ा करता और धीरे धीरे उसको बूब्स को दबाता, मुझे अब मजा आने लगा था। वो कई बार मेरा इस्तेमाल करती, जब उसे सेक्स करने की इच्छा होती, वो मुझसे अपने बूब्स दबवाती अपनी चूत में मेरी ऊँगली पकड़ के डालती और फ़िर थोडी देर बाद चली जाती और मेरा लंड खड़ा का खड़ा रह जाता। फ़िर मैं गुस्से से उसकी तरफ़ देखता रहता।

उस वक़्त मुझे मुठ मारने के बारे में पता नहीं था। ऐसा कई बार होता कि वो आकर मुझसे बूब्स दबवाती, चुसाती अपनी चूत में मेरी ऊँगली डलवा कर हिलाती और थोडी देर बाद चली जाती। मैं हर बार सोचता रहता कि उसको कैसे चोदूँ मगर वो मुझे कभी चोदने नहीं देती थी।

एक रोज जब हम सबको बाहर जाना था तो वो ऊपर के कमरों को देखने गई कि कुछ खुला तो नहीं रह गया ना ! सभी लोग घर से बाहर निकलने लगे थे तभी मैं मेरी बहन के पास ऊपर गया। उसने सभी खिड़की दरवाजे बंद कर दिए थे और अचानक मैं उसके पास पहुँच गया। मैंने उसे पकड़ लिया, उसने अपने आपको छुडाने की कोशिश की मगर मैं एकदम अपने आपे से बाहर हो गया था। उस वक़्त मेरे दिमाग में सिर्फ़ और सिर्फ़ हवस भरी हुई थी। मैं उसे छोड़ना नहीं चाहता था इसलिए मैंने उसे कस कर पकड़ लिया और उसके कपड़े खींचने लगा, उसे चूमने लगा, किस करने लगा मगर उसने मेरा हाथ अपने मुँह में ले कर काट लिया और अपने आप को छु्ड़ा कर नीचे चली गई।

उस वक़्त मुझे काफी निराशा हुई। उस दिन भी मुझे कुछ करने का मौका नहीं मिला। तब से मैंने तय कर लिया कि आज के बाद चाहे जो हो जाए लेकिन मैं अपनी उस स्वार्थी बहन के साथ कभी भी सेक्स नहीं करूँगा।

थोड़े दिनों के बाद जब मैं अपने बिस्तर पे सो रहा था तो वो आई, मेरा हाथ पकड़ा और अपने बूब्स दबवाने लगी तो मैंने अपना हाथ उससे छुड़ा कर वहां से चला गया। लेकिन मेरा लंड तो खड़ा हो गया था । मुझे ऐसा लग रहा था के काश कोई लड़की मिल जाए तो साली को पकड़ कर उसकी चूत में अपना लंड डाल कर जन्नत की सैर कर लूँ मगर कुछ हाथ नहीं लगा।

थोड़े दिनों बाद मेरी मौसी की लड़की जिसकी उमर भी मेरे जितनी थी वो मेरे घर पे आती जाती रहती थी मेरा मन ललचाया कि क्यूँ ना इस के साथ सेटिंग की जाए।

फ़िर मैं सोचने लगा कि किस तरह इसके साथ सेटिंग किया जाए?

एक दिन मैं टीवी देख रहा था, तभी वो ऊपर आई टीवी देखने लगी मुझे कुछ कुछ होने लगा। मैंने सोचा कि जाकर इसको पकड़ लूँ, मगर डर लग रहा था। बहुत टाइम से मेरा लंड भूखा था और मेरी उस स्वार्थी बहन जो सिर्फ़ अपनी प्यास बुझवाती थी, उसने कभी भी मुझे चोदने नहीं दिया था। इस लिए मुझे इसे तो किसी भी कीमत पर चोदना ही था। मैं पलंग से धीरे से उठा और उसे कहा- तुझे अगर सोना है तो तू यहाँ पलंग पर सो सकती है, मैं बैठ जाता हूँ। तो उसने कहा- ठीक है !

फ़िर वो पलंग पर आ के लेट गई और मैं वहीं पलंग पर बैठ के टीवी देखने लगा। फ़िर धीरे धीरे मैं अपना हाथ उसके पैरों पर फिराने लगा। उसे गुदगुदी हो रही थी इसीलिए उसने कोई विरोध नहीं किया। उसे उसमे मजा आ रहा था मगर उसे सेक्स के बारे में कोई जानकारी नहीं थी। धीरे धीरे मैं उसकी जांघों के करीब अपना हाथ ले गया और थोड़ी देर सहलाने के बाद मैंने उससे पूछा- मजा आ रहा है?

तो उसने कहा- हाँ ! मगर तुम यह क्या कर रहे हो?

मैंने कहा- देखो किसी से कहना मत ! वरना हम दोनों को बहुत मार पड़ेगी !

उसने कहा- नहीं कहूँगी !

मैंने कहा- ठीक है !

मैंने उससे कहा- पिक्चर में हीरो हेरोइन जैसे एक दूसरे को चूमते हैं और मजे करते हैं हम भी वैसा ही करेंगे ! बहुत मजा आयेगा।

उसने कहा- ठीक है !

फ़िर मैं अपने हाथों को उसके सीने की ओर ले गया और उसके छोटे छोटे बूब्स को दबाने लगा। उसके बाद मैंने उससे कहा कि अब तुम अपनी कमीज उतार दो ! तो उसने अपनी कमीज उतार दी। फ़िर मैंने उसके बूब्स को चूसना शुरू कर दिया। मैं बारी बारी से उसके बूब्स को दबाता और चूसता। मुझे बहुत मजा आ रहा था। मुझे लगा कि अब मेरी चोदने की इच्छा पूरी हो जायेगी और मुझे अपनी उस मतलबी बहन की ज़रूरत भी नहीं पड़ेगी, क्यूंकि मेरे पास अब मेरी मौसी की लड़की थी।

मैं जैसा कहता था वो वैसा ही करती थी। फ़िर मैंने धीरे से उसका लहंगा नीचे सरकाया तो देखा कि उसने अन्दर चड्डी नहीं पहनी थी। उसकी एकदम मुलायम और कमसिन चूत मेरे सामने थी, चूत पर बालों का कोई अता पता नहीं था, एकदम चिकनी चिकनी बादाम जैसे लग रही थी।

मैंने धीरे धीरे ऊँगली उसकी चूत में फिराना शुरू कर दिया। उसे मजा आ रहा था। मेरा लंड भी एकदम कुतुबमीनार जैसा खड़ा हो चुका था। फ़िर मैंने धीरे से भगवान का शुक्रिया अदा किया कि किसी ने सच कहा है- तेरे यहाँ देर है अंधेर नहीं।

मेरी इच्छा पूरी होने वाली थी। मैंने जल्दी से अपनी पैन्ट उतारी और लंड एकदम से बाहर आ गया, मैंने चड्डी नहीं पहनी थी। मैंने उसे लंड दिखाते हुए कहा- देख कैसा लग रहा है?

तो उसने कहा- ये क्या है?

उसे वाकई में पता नहीं था सेक्स क्या होता है, लंड क्या चीज़ है।

मैंने उसे कहा- इसको इसे मुँह में लेकर चूस ! बहुत मजा आयेगा !

उसने उसे मुँह में लेकर चूसना शुरू कर दिया। थोड़ी देर बाद मुझे एकदम से गुदगुदी हुई। मुझे बहुत मजा आ रहा था और अचानक मेरे लंड से कुछ सफ़ेद चिकना सा निकलने लगा तो मेरी बहन ने एकदम से मेरा लंड अपने मुँह से बाहर निकल लिया और कहा- यह क्या है?

उस वक़्त मुझे भी पता नहीं था कि यह क्या है।

मैं घबरा गया और जल्दी से हम दोनों ने कपड़े पहन लिए और हम वहां से चले गए। फ़िर मैंने बाथरूम में जाकर अपने लंड को देखा कि क्या हुआ था।

उसके बाद मैंने अपने दोस्तों से पूछा कि यारो कल मेरे लंड से कुछ निकला था। फ़िर मुझे पता लगा कि वो वीर्य होता है और १२ साल के आसपास लड़कों को यह निकलना शुरू हो जाता है। फ़िर मुझे मुठ मारने का मतलब पता चल गया।

कुछ रोज़ बाद जब मेरी मौसी की लड़की फ़िर से मेरे घर आई तो मैंने उसे ऊपर आने को कहा। वो ऊपर आई, फ़िर मैंने उसे धीरे धीरे नंगा करना शुरू किया क्यूंकि मुझे अपना अधूरा काम पूरा करना था, ज़िन्दगी की पहली चुदाई करनी थी।

मैंने उसका लहंगा भी उतार दिया, फ़िर मैंने अपनी पेंट भी उतार दी। मैंने उसे किस किया, बूब्स दबाना और चूसना शुरू कर दिया। फ़िर मैंने उसे अपना लंड मुँह में लेने को कहा मगर उसने मना कर दिया। मैंने भी कोई जबरदस्ती नहीं की। फ़िर मैं उसके ऊपर लेट गया और अपना लंड उसके हाथ में दे दिया और कहा कि तुझे जहाँ खुजली हो रही है वहाँ इसे डाल दे, यह खुजली मिटा देगा, क्यूंकि मुझे पता नहीं था किस छेद में डालते हैं। फ़िर उसने उसे सही छेद के दरवाजे पर ले जा के खड़ा कर दिया। मैं धीरे से उसके चूत के छेद में डालने लगा, थोड़ी दिक्कत हो रही थी क्यूंकि हम दोनों का पहली बार था। फ़िर धीरे धीरे डालना शुरू कर दिया, मुझे बहुत मजा आ रहा था उसे भी मजा आ रहा था।

उस दिन मेरा जन्नत का सफर पूरा हो गया । उसके बाद हम दोनों को पता चल गया था के सेक्स किस को कहते हैं।

उसके बार जितनी भी बार हमने चुदाई की बहुत मजे से की। यह सिलसिला दो साल तक चला। उसके बाद सब बंद हो गया। तब से अब तक मैंने किसी को चोदा नहीं। मगर चोदने की इच्छा अपने दिल में लिए रोज किसी का इन्तजार करता रहता हूँ।