आँटी की चुदाई ट्रेन में

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मै बिलासपुर से तिरुवन्तमपुरम ट्रेन मैं यात्रा कर रहा था। इस Aunty ki chudai train mein तो बड़ी ही साधारण सी थी। ये आण्टी रायपुर से ट्रेन में चढी थी। वो अपनी 2 वर्ष की बेटी के साथ इस कम्पार्टमैंन्ट में चढ गई। उसकी सीट बिलकुल मैंरे साथ की थी। ये सीट मात्र दो जनों के लिये पर्याप्त थी, मतलब आप समझ सकते है। जब मैं रायपुर स्टेशन पर उतरा तो मै उसके पति से मिला। उसके पति ने मैंरा मोबाइल नम्बर लिया और मुझे कहा कि प्लीज मेरी बात मेरी बीवी से समय समय पर करवाये। मैं मान गया और मैंने अपने मोबाइल नम्बर उसे दे दिया। उसका नाम था सुरेश उतना सुन्दर नहीं था पर उसकी बीवी का नाम श्वेता था और मा कसम बिलकुल डेयरी मिल्क कि तरह वो साफ़ सुथरी थी। तो उसके पति ने उसी समय उसकी बीवी से मेरा परिचय करवाया। उसकी मुस्कान मैं जादू था। जैसे कि एक नया फूल बाग में खिल रहा हो। ठीक 12 बजे ट्रेन वहा से चल दी। और उसके पति ने मुझे धन्यवाद कहा।

अब होना क्या था मैंने उसके बेटी को अपने गोद में लिया और खूब प्यार करने लगा। फिर श्वेता आण्टी ने कहा कि मैं कपड़े बदल कर आती हूँ तो तब तक मैं उसकी बेटी का ख्याल रखूं। जब वो कपड़े बदलकर आई तब मैंने देखा उसकी ब्रा थोड़ी पारदर्शी थी। मैं उसके बूबस को देखता रह गया। थोड़ी देर बाद मुझे जब होश आया तो मैंने उसका पूरा परिचय लिया तब मैंने जाना कि वो चैनई मैं रहती है और उसके पति रायपुर के किसी बैंक में काम करते हैं और छुट्टी के वक्त वो चैन्नई आते थे। तब मैंने तुरंत सोच लिया कि ये शायद सेक्स नहीं करती होगी। अचानक उसकी बेटी ने मैंरे लिप्स को किस किया जिसका मैंने भी उसे प्यार से उत्तर दिया। और वो हम दोनो के किस को बड़े प्यार से देख रही थी।
जब सोने का वक्त आया तो मैंने देखा उसकी बेटी मेरे साथ सोने कि ज़िद कर रही हैं तो श्वेता आण्टी ने मुझे अपनी बेटी मुझे दे दिया। मैं उपर सो रहा था और श्वेता नीचे सो रही थी। पर मैं कहा सो पा रहा था उसकी मस्त जवानी को देख देख कर मैं उसकी दो साल कि बेटी को किस पे किस किये जा रहा था। तब आधे घन्टे बाद श्वेता उठकर अपनी बेटी को उठा रही थी कि अचानक मैंने थोड़ा सा उदास होने का नाटक करने लगा। मैंने कहा कि प्लीज अपनी बेटी को मेरे पास सोने दे। तो उसने तुरंत मुझे अपनी बेटी दे दी और वो नीचे थोड़ी देर बैठ कर चुपके से रोने लगी।

मैं तुरंत नीचे उतरकर उनसे सॉरी कहा। तो उसने कुछ नहीं कहा। फिर मैंने थोड़ी सी हिम्मत करके उनका हाथ पकड़ कर मेरे गाल पर थोड़ा ज़ोर से थप्पड़ दिलवाया तो वो मुझे कहने लगी कि ये क्या कर रहे हो? मैंने कहा कि अगर मैं आपकी बेटी अपने साथ ना सुलाऊं तो ठीक हैं मुझे माफ़ करना। तो वो थोड़ा और रोने लगी। वैसे मैं उस कम्पार्टमेन्ट के बारे मैं बता दूं। वैसे तो हमरे बगल वाला खाली था। और हम ए सी में यात्रा कर रहे थे तो उसमें परदे लगे होते हैं जिससे कोई हमें देख नहीं सकता था।

तो मैंने उसका हाथ पकड़कर पूछा कि वो क्यू रो रही हैं तो उसने बताया कि उसके पति उससे प्यार नहीं करते हैं और ना ही उसकी बेटी से। तो मैंने कहा ऐसा ना कहे वो अपको ज़रुर याद करते होंगे। तो वो फिर भी रोने लगी मैंने और थोड़ी सी हिम्मत करके उनके आंसू पोछा तो उसने मैंरे हाथ को पकड़ कर उसे किस किया। जिससे मैं कुछ ना कह सका। मैंने धीरे से उसके कान के पास जाकर कहा कि मैं उसकी बेटी से और उसकी खूबसुरत मा से बहुत प्यार करता हु। तो उसने आंखे बन्द करके मुझसे लिपट गई।

Aunty ki chudai train mein

मैं उसके बूबस को फ़ील कर रहा था, तो उसने भी धीरे से जवाब दिया कि चलो अब बेटी से प्यार खतम हो गया हो तो उसकी मा को प्यार करो। मैंने उसे पहले उसके माथे पर किस किया फिर मैं उसके कानों को फिर नाक को फिर उसके गालों को मैंने अच्छी तरह से चाटा और फिर उसके मुलायम से होठ को किस करने लगा। वो थोड़ी गरम हो गई थी।मैंने उससे कहा कि तुम सो जाओ, तो उसने कहा- क्यूं ? मैंने कहा तुम पहले लेट जाओ फिर देखो मेरा जादू।

वो तुरंत मुसकुराई और लेट गई। मैं तुरंत बाथ रूम गया और अपनी चड्डी निकाल कर मैं सिर्फ़ अपनी लोवेर पहनकर वापस आया। वो मेरा बेसबरी से इन्तज़ार कर रही। थी मैं उसकी आंखो मैं प्यार कि प्यास देख सकता था। मैं अन्दर बैठ गया और मैंने परदा गिरा दिया ताकि हमें कोई ना देख सके। मै अब धीरे से उसके बूबस को मसल रहा था। वो बेचारी ज़ोर जोर से चिल्लाना चाहती थी पर वो चिल्ला ना सकी और अपने आवाज़ पे उसने कन्ट्रोल किया। मैंने धीरे से उसके के अन्दर हाथ डालकर उसकी ब्रा खोल दी। उसने कहा कि मुझे नंगी कर दो। तो ये बात सुनकर और गरम हो गया। मैंने बड़े आरम से उसकी चूड़ीदार को उतारा और उसके बूब्स और उसके लिप्स के साथ प्यार करता रहा।

मैंने भी अपने कपड़े उतारे मैं सिरफ़ बनियान और अपने लोवर मैं था। और वो सिरफ़ अपने पजामा और पेण्टी के साथ थी। मैं उसके बूबस के साथ 15 मिनट तक प्यार करता रहा। फिर मैंने अपना हाथ उसके पाजामें के अन्दर डालकर उसके चूत को पेण्टी के बाहर से सहला रहा था। वो मुझे पागलो कि तरह देख रही थी। फिर उसने मेरे लिप्स को प्यार से काटा जिस्से मैं और मेरा नटराज पेन्सिल और गरम हो गये। मैंने अपनी हाथो से उसका नाड़ा खोला और उसकी पेण्टी को थोड़ा नीचे कर दिया और अब मैं उसे धीरे धीरे उसकी चूत के अन्दर अपने उन्गली घुसा रहा था। उसकी चूत तो पहले से हाय गीली थी। अब मैंने उसको अपने दोनो उन्गली से उसके स्लिट को टटोला तो उसकी सांसे तेज़ हो गई और मुझे वो नज़ारा देखने मैं बड़ा मज़ा आ रहा था। मैंने अचानक तीन अंगुली उसकी शरपनेर (चूत) मैं ज़ोर ज़ोर से अन्दर बाहर करने लगा अब तो वो बेकाबू हो गई थी। वो मेरा साथ देने लगी थी। मैं उसे किस भी कर रहा था और एक हाथ उसके बूबस और निपल्स को मसल रहा था और दूसरा हाथ उसके चूत में ज़ोर ज़ोर से घुसा रहा था। ठीक पांच मिनट के बाद उसने अपना ज्यूस बाहर निकाला और मैं उसके सामने उसे चाटने लगा तो उसने कहा – ऐसा तो मेरे पति भी नहीं करते हैं। तो मैंने कहा प्लीज इस वक्त अपने पति को मत याद करो तो वो थोड़ा मुसकुराई और मैंने उसे कहा अब मेरा क्या होगा ? तो उसने कहा – चलो बाथ रूम मे चलें।