पड़ोसी की नई शादीशुदा बीवी की सील तोड़ी

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पड़ोसी की नई शादीशुदा बीवी की सील तोड़ी

में कोलकाता में रहता हूँ और में वहां पर बिल्कुल अकेला रहता हूँ और यह घटना जो मेरे साथ घटी, ये करीब तीन या चार महीने पहले की है। उस दिन अपने ऑफिस से अपने घर पर थोड़ा जल्दी आ गया था, क्योंकि उस दिन मेरी तबियत मुझे कुछ ठीक नहीं लग रही थी और फिर में जैसे ही अपने रूम के पास गया तो मैंने देखा कि मेरे रूम के पास वाले रूम में उस समय बहुत भीड़ थी। उस रूम के सामने बहुत सारी लड़कियाँ और बच्चे खड़े हुए थे, उन्हें इस तरह से देखकर में बिल्कुल भी समझ नहीं सका कि यह सब क्या हो रहा है? फिर में अपने रूम के अंदर चला गया। फिर थोड़ी देर बाद मुझे बाहर से कुछ आवाज़े आई, जैसे कई बच्चे आपस में बात करते हुए कि देखो यह दुल्हन कितनी सुंदर है ना और वो उसे देखकर बहुत खुश हो रहे थे। तभी में उनकी बातें सुनकर तुरंत समझ गया कि पास वाले रूम में कोई शादी होकर नया जोड़ा यहाँ पर रहने के लिए आया होंगा, लेकिन अब उनकी बातें सुनकर मेरा भी बहुत मन कर रहा था कि में उस दुल्हन को एक बार देख लूँ, लेकिन यह बिल्कुल भी मुमकिन नहीं था। फिर करीब तीन चार दिन के बाद मुझे मेरी अच्छी किस्मत से उस नई नवेली दुल्हन को देखने का मौका मिल ही गया। पड़ोसी की नई शादीशुदा बीवी की सील तोड़ी उस दिन में सुबह जब उठकर फ्रेश होने के बाद तैयार होकर अपने ऑफिस जाने के लिए जैसे ही अपने रूम के दरवाजे से बाहर निकला तो मेरी नज़र उस मेरे पास वाले रूम की तरफ पड़ी जिसमें वो दुल्हन थी।

फिर मैंने देखा कि एक 20-22 साल की सुंदर लड़की वो उस समय सूट पहने हुए थी, वो क्या मस्त लग रही थी और उसका फिगर बाहर से देखने में आकार में एकदम ठीक-ठाक था, लेकिन दोस्तों उसके बूब्स बहुत मस्त थे और वो बिल्कुल गोलमटोल थोड़े उभरे हुए थे। फिर मैंने उसका चेहरा बहुत बार देखने की नाकाम कोशिश की, लेकिन उसके चेहरे पर उसका वो घूँघट था, उसकी नज़र जैसे ही मेरी तरफ पड़ी तो वो जल्दी से अंदर की तरफ चली गई, लेकिन मेरा लंड तो उसके सेक्सी बदन को देखकर तनकर खड़ा हो गया और अब मेरे दिमाग़ में उसके लिए बहुत सारी गंदी गंदी बातें आने लगी थी और में अपने ऑफिस में पहुंचने के बाद भी उसके बारे में ही सोचने लगा। फिर मेरा वो पूरा दिन उसके बारे में सोचते सोचते निकल गया और मुझे बिल्कुल भी पता नहीं चला कि कब रात हो गई और अपने रूम पर वापस आ गया और जब में अपने रूम पर पहुँचा तो मैंने उसके रूम की तरफ नज़र डालकर देखा, लेकिन वो इस बार मुझे कहीं नहीं दिखी। फिर में एक नजर डालकर अपने रूम के अंदर चला गया और फिर से में उसी के बारे में सोचने लगा। फिर में बहुत देर तक अपने बेड पर लेटा और उसी के बारे में सोचता रहा, मेरी नजरों के सामने बार बार उसका सेक्सी बदन मुझे दिख रहा था और में उसी के सपने देख रहा था।

तभी कुछ देर बाद मेरे दरवाजे की घंटी बजी और मैंने उठकर दरवाजा खोल दिया। मैंने देखा कि एक आदमी बाहर खड़ा हुआ था, वो अपने हाथ में एक बोतल लिए खड़ा हुआ था, में उसको देखकर बहुत चकित था, क्योंकि उसको मैंने पहले कभी नहीं देखा था और उसके हाथ में एक खाली बोतल भी थी, में उसके बारे में ना जाने क्या सोचने लगा और फिर मैंने उससे पूछा कि कौन हो तुम और तुम्हें मुझसे क्या काम है? तो उसने मुझे बताया कि में यहाँ पर आपके बिल्कुल पास वाले रूम में रहने के लिए कुछ दिन पहले ही नया नया आया हूँ और हमारी नयी शादी हुई है, मुझे आज आप से पीने के लिए थोड़ा सा पानी चाहिए था, मुझे उसकी ज़रूरत है और मेरे पास जो भी पानी था, वो खत्म हो गया है, प्लीज अगर आप मुझे थोड़ा पानी दे दे तो मेरा और मेरी पत्नी का आज रात भर काम चल जाएगा और कल सुबह तो कहीं और से इंतजाम कर लूँगा। फिर मैंने उससे तुरंत कहा कि हाँ ज़रूर, में आपको पानी के लिए क्यों मना करूंगा, क्या कभी पानी के लिए भी किसी को मना किया जाता है? आपको मुझसे जितना पानी चाहिए आप ले जा सकते है और इसके आलावा भी अगर आपको मेरी कोई भी जरूरत हो तो आप मुझे जरुर बता देना और फिर मैंने उससे कहा कि प्लीज आप अंदर आ जाए। फिर वो मेरे कहने पर अंदर आ गया और फिर हम दोनों ने एक दूसरे से बातें करना शुरू कर दिया। में उसे कुछ अपने बारे में बताने लगा और उससे उसके बारे में पूछने लगा। तब उसने मुझे बताया कि उसकी शादी अपनी मर्जी से हुई है और उसका नाम शाहबाज़ है और उस लड़की यानी उसकी पत्नी का नाम सीमा है और फिर मैंने भी अपने बारे में उसे बाकी सब कुछ बता दिया और अब हम लोगों में बहुत अच्छी दोस्ती हो गई और कुछ देर मुझसे बातें करके जाते समय मुझसे धन्यवाद कहकर वो पानी लेकर अपने रूम पर चला गया।

फिर एक दो दिन के बाद उसने मुझे मेरे घर पर आकर अगले दिन अपने घर पर खाना खाने के लिए कहा और उसने मुझसे कहा कि आप अपने ऑफिस से आ जाने के बाद मेरे घर पर आकर खाना खा लेना। दोस्तों में तुरंत उसकी वो बात मान गया और में उसके मुहं से यह बात सुनकर मन ही मन बहुत खुश था, क्योंकि में खुद भी उसके घर पर जाकर उसकी पत्नी को एक बार देखना जरुर चाहता था। फिर दूसरे दिन में सुबह उठा और बहुत खुश होकर अपने ऑफिस चला गया और वहां पर पहुंचने के बाद मेरा मन किसी भी काम में नहीं लग रहा था और में पूरे दिन उसके घर पर जाने की बात और उसकी पत्नी को करीब से देखने की अपनी इच्छा को लेकर मन ही मन बहुत उत्सुक था। फिर रात को में अपने ऑफिस से वापस अपने रूम पर आ गया और जैसे ही मैंने अपने कमरे का दरवाजा खोला, तो वैसे ही शाहबाज़ उसके कमरे से निकलकर बाहर अपने दरवाजे पर आकर खड़ा हो गया और फिर वो मुझसे बोला कि जल्दी से आ जा, में कब से खाना खाने के लिए तेरा इंतजार कर रहा था। फिर मैंने उससे कहा कि ठीक है में थोड़ा फ्रेश होकर अभी कुछ देर में आता हूँ और में अपने रूम में अंदर चला गया और फ्रेश होने लगा।

उसके थोड़ी देर बाद में अपने रूम का दरवाजा बाहर से बंद करके उसके घर पर जाने लगा। फिर मैंने जैसे ही उसके कमरे के दरवाजे के अंदर अपना पहला कदम रखा तो मैंने देखा कि उसकी बीवी यानी सीमा एकदम सामने बैठी हुई टी.वी. देख रही थी और इस बार मुझे उसके चेहरे को देखने का वो मौका मिल गया, जिसके लिए में बहुत बैचेन था उफफफफ्फ़ दोस्तों वो दिखने में बहुत ही सुंदर थी और फिर मेरी नज़र उसके बूब्स पर पड़ी, यानी उसके बूब्स पर मुझे तो मज़ा आ गया और दोस्तों उसने उस समय अपने बदन पर दुपट्टा नहीं रखा था, जिसकी वजह से उसकी छाती आधी उसके कपड़ो से बाहर दिख रही थी और वो बहुत सुंदर नजारा था, में उसे शब्दों में नहीं बता सकता और मैंने जैसे ही वो सब देखा तो में वहीं पर रुक गया और मेरा लंड उसके सेक्सी बदन को देखकर बिल्कुल तनकर खड़ा हो गया। थोड़ी देर बाद उसकी नज़र मेरी तरफ पड़ी तो वो झट से उठी और वो दुपट्टे से अपना सर छुपाती हुई अपने रूम की तरफ चली गई।

अब में अंदर चला गया, लेकिन मेरा खड़ा लंड साफ साफ दिख रहा था, क्योंकि उस समय मैंने अपनी अंडरवियर को उतार रखा था और ट्राउजर पहन रखा था और अब मैंने देखा कि शाहबाज़ उसकी पत्नी के अंदर जाते ही तुरंत अपने रूम से बाहर आ गया और उसने मेरी तरफ देखकर मुझसे कहा कि हाँ आ जाओ, हम दोनों आज यहीं खाना खाते है। फिर मैंने उससे तुरंत हाँ बोल दिया और में अंदर उसके पीछे पीछे उसके रूम की तरफ चला गया। फिर शाहबाज़ ने अब उसकी बीवी यानी सीमा को आवाज़ लगाकर कहा कि हमारे लिए खाना गरम कर दो, तब तक में थोड़ा बाथरूम से आता हूँ और फिर उसने मुझसे कहा कि में अभी आता हूँ और वो चला गया। दोस्तों मेरा लंड तो अब तक खड़ा हुआ था और वो शांत ही नहीं हो रहा था। मैंने बहुत बार उसको शांत करने की कोशिश की, लेकिन ऐसा नहीं हुआ और अब मैंने उसकी बीवी का वो मस्त फिगर देखकर सोचा कि में अब थोड़ा और देख लूँ, क्योंकि उसकी बीवी बहुत मस्त थी।

अब मेरी नज़र उसे ढूँडने लगी थी और मेरे पैर अपने आप चलने लगे और में उसको ढूँडते ढूँडते उसकी किचन के पास चला गया और वहां पर पहुंचकर मैंने देखा कि सीमा खड़ी हुई थी, लेकिन उसका चेहरा उस समय दूसरी तरफ था और उसके पीछे में खड़ा हुआ था। अब में लगातार उसकी कमर को देख रहा था। दोस्तों उसकी गांड भी बहुत मस्त थी और वो ना ज़्यादा बाहर और ना ही ज़्यादा अंदर, लेकिन मस्त थी और में उसे देखने सोचते अपने लंड को मसल रहा था। कुछ देर बाद मेरा दिमाग़ अब बिल्कुल पागल होने लगा था और में अब पूरे जोश में आ गया था। अब मेरे कदम अपने आप आगे बढ़ने लगे थे, में बिल्कुल उसके पीछे जाकर खड़ा हो गया और तुरंत मैंने अपने लंड को एक हाथ में पकड़कर उसकी गांड में पीछे से उसके कपड़ो के ऊपर से छूने लगा और फिर जैसे ही मैंने अपने लंड का दबाव उसकी गांड पर बनाया और तभी वो अचानक से छटपटा गई और वो मुझसे थोड़ा दूर चली गई।

दोस्तों उसी समय मेरा नशा टूट गया और मुझे अपने ऊपर बहुत गुस्सा आने लगा, वो भी मेरी तरफ देखने लगी, में अपना सर नीचे किए कुछ देर खड़ा रहा और वो मेरे लंड को देखने लगी। में जल्दी से वहां से निकलकर जहाँ पर हम लोगों ने खाना खाने का प्लान बनाया था और में दोबारा वहीं पर चला गया और अब में मन ही मन सोचने लगा कि मैंने उसके साथ यह क्या किया? मुझे ऐसा नहीं करना चाहिए था, लेकिन सच पूछो तो दोस्तों मुझे ऐसा करने में मज़ा भी बहुत आया था। दोस्तों उसकी गांड उफ़फ्फ़ मुझे ऐसा लगा जैसे कि मेरा लंड उसकी गांड के बीच में उसके कपड़ो को फाड़कर अंदर चला जाएगा। फिर थोड़ी देर बाद शाहबाज़ आ गया और उसने दोबारा अपनी बीवी को एक आवाज़ लगाई कि सीमा खाना लेकर आ जाओ, क्या वो गरम हो गया? फिर थोड़ी देर बाद सीमा खाना लेकर आ गई और हमारे लिए वो खाना लगाने लगी, लेकिन तब मैंने देखा कि उसकी नज़र अब भी मेरे लंड की तरफ थी, वो अपनी आंख को बिना पलक झपकाए लगातार मेरे लंड को देखे जा रही थी, जो इस वक़्त भी बिल्कुल तनकर खड़ा हुआ था और वो अब भी सोया नहीं था। फिर वो कुछ देर बाद हमे खाना लगाकर चली गई।

हम दोनों ने अपना अपना खाना खत्म किया और कुछ देर बातें करने के बाद में अपने रूम पर सोने के लिए चला गया, लेकिन मेरा दिमाग़ अब भी उस बात को बार बार याद कर रहा था और उस वजह से मेरा लंड नहीं सो रहा था। दोस्तों इस तरह उसके ख्याल में कई दिन गुजर गये, लेकिन मेरे दिमाग़ से वो बात नहीं जा रही थी। में तो अब यह सोचने लगा था कि कैसे भी में अब उसको पकड़कर चोद दूँ, मेरे मन में अब बार बार बस वही विचार आ रहे थे और कुछ ही दिन बाद मेरी अच्छी किस्मत से मेरे हाथ एक बहुत ही अच्छा मौका आ गया, उसका पति यानी शाहबाज़ काम की तलाश में इधर उधर भटक रहा था और एक दिन वो सुबह सुबह अचानक मेरे रूम पर आ गया और उसने मुझसे कहा कि मुझे आज एक नई नौकरी मिली है और में उसी के सिलसिले में बाहर जा रहा हूँ, इसलिए तू भी प्लीज मेरे साथ चल, तेरे साथ मुझे अच्छा लगेगा। दोस्तों तभी तुरंत मेरा शैतान दिमाग़ दौड़ा और मैंने उससे कहा कि मेरी तबियत आज थोड़ी ठीक नहीं है और इस वजह से में आज अपने ऑफिस भी नहीं गया, तू मुझे माफ़ कर देना भाई, तू अकेला ही चला जा। फिर वो मुझसे बोला कि चल ठीक है में अकेला ही चला जाता हूँ, लेकिन तू मेरा एक काम जरुर कर देना, घर पर आज मेरी पत्नी सीमा बिल्कुल अकेली है तो उसे अगर किसी चीज़ की ज़रूरत पड़े तो तू उसे वो जरुर ला देना, वो यहाँ पर कोई भी सामान की दुकान, बाजार कुछ भी नहीं जानती। फिर मैंने उससे कहा कि ठीक है, में इतना तो कर ही दूँगा और वो मुझसे यह बात बोलकर चला गया।

तब से में बस मन ही मन यह बात सोचने लगा कि किस बहाने से में उसके घर पर जाऊंगा? मुझे आज कैसे भी करके उसकी चुदाई जरुर करनी है और मुझे आज एक बहुत अच्छा मौका मिला है, मुझे इसका कैसे भी करके फायदा उठाना चाहिए? तभी बाहर से मुझे एक मीठी सी आवाज़ आई, रेहान क्या तुम अभी फ़ुर्सत में हो? उसको सुनते ही मेरे तो होश का कोई ठिकाना नहीं रहा, लेकिन फिर में कुछ देर उस आवाज को अपने कानों की गलती समझकर सोचने लगा, लेकिन कुछ देर बाद जब मुझे दोबारा वो सुनाई दी तो मैंने जल्दी से उठकर ज़ोर से हाँ कहते हुए उसके रूम में चला गया। फिर मैंने उसके कमरे में जाते ही देखा कि वो एक काली कलर की साड़ी पहने हुई थी, उफफफ्फ़ वाह क्या सेक्सी लग रही थी। दोस्तों वो एकदम मस्त दिख रही थी और मैंने बस उसको इतना ही देखा था कि मेरा लंड एक बार फिर से उसके सामने जाकर तुरंत खड़ा हो गया था। अब वो मेरी तरफ देखने लगी और वो मुझसे बोली कि क्या तुम बाज़ार से मुझे कुछ सब्जियां ला दोगे? और तब उसकी नज़र मुझसे बात करते समय भी मेरे चेहरे की तरफ नहीं थी। मैंने देखा कि वो तो मेरे लंड को बिना अपनी आँख झपकाए लगातार घूर घूरकर देखे जा रही थी।

फिर में उसके कहने पर बाजार सब्ज़ी लाने चला गया और जब में करीब 15-20 मिनट के बाद घर पर लौटा तो मैंने देखा कि वो किचन में आज भी बिल्कुल वैसे ही खड़ी हुई है, जैसे पहले दिन खड़ी थी और उसका मुहं दूसरी तरफ और पीठ मेरी तरफ यानी दरवाजे की तरफ। फिर मैंने इस बार थोड़ा कमीनापन दिखा दिया और बहुत हिम्मत करके इस बार में चुपचाप उसके पीछे चला गया और मैंने उसकी साड़ी को हल्के से ऊपर खींचना चाहा, लेकिन वो इस बार पहले ही सचेत हो गई और तुरंत डरकर मुझसे दूर हटकर खड़ी हो गई, लेकिन वो मुझसे कुछ नहीं बोली और मैंने उसे सब्जी दे दी और वहीं पर थोड़ी देर खड़े रहने के बाद में एक बार फिर से मौका पाकर उसके पीछे चला गया और मैंने अब दोबारा उसकी साड़ी को ऊपर खींचा, लेकिन दोस्तों इस बार वो मुझसे कुछ भी नहीं बोली, एकदम चुप रही। फिर मैंने उसे अपनी बाहों में जकड़ लिया और अब मैंने उसकी साड़ी को ऊपर करके तुरंत उसकी पेंटी को नीचे कर दिया और अब में अपने एक हाथ से उसके बूब्स को दबाने और दूसरे हाथ से उसकी चूत को सहलाने लगा था। फिर मैंने महसूस किया कि उसकी वजह से वो कुछ ही देर में एकदम आग की तरह गरम हो गई और धीरे धीरे मोन करने लगी।

फिर मैंने जल्दी से उसकी चूत में अपनी एक उंगली को डाल दिया और मेरी उंगली के चूत के अंदर जाते ही वो उछल पड़ी और तब मैंने महसूस किया कि उसकी चूत इतनी टाईट थी कि मुझे अब यह बात बिल्कुल भी समझ में नहीं आ रही थी कि उसका पति उसको चोदता भी है या नहीं, मुझे अब ऐसा लगा कि जैसे उसकी सील अब भी पैक है और जब में अपनी उंगली को अंदर बाहर करने लगा तो वो उहफफफ्फ़ आहह्ह्हह हाँ और ज़ोर ज़ोर से करो, उफफ्फ्फ्फ़ हाँ मज़ा आ गया करने लगी। फिर पांच मिनट के बाद उसने अचानक से मेरा हाथ पकड़कर ज़ोर से खींचकर अपनी चूत से बाहर निकाल लिया और उसने जल्दी से अपनी पेंटी को ऊपर किया और वो अपने रूम की तरफ चल गई। दोस्तों में यह देखकर एकदम हैरान था कि वो मुझे अपने रूम में आने का इशारा कर रही थी, में उसके रूम की तरफ उसके पीछे पीछे बढ़ा। तभी मैंने देखा कि वो अंदर तो चली गई, लेकिन उसने अपने रूम को बंद नहीं किया। फिर में भी उसके पीछे पीछे अंदर चला गया। तब मैंने देखा कि वो अपने बेड पर बिल्कुल सीधी लेटी हुई है और उसे देखकर में तुरंत समझ गया कि यह आज मुझसे अपनी चुदाई करवाना चाहती है और में ऐसा मौका कभी भी नहीं छोड़ सकता था। तभी में अंदर गया और मैंने उसके कमरे के दरवाजे को अंदर से बंद किया और फिर में उसके बेड पर बिल्कुल उसके पास में लेट गया और धीरे से उसकी साड़ी को ऊपर की तरफ करने लगा और फिर मैंने धीरे से उसकी पेंटी को पूरा नीचे करके अब मैंने उसकी छोटी सी प्यासी बिना चुदी चूत को देखना चालू किया।

पड़ोसी की नई शादीशुदा बीवी की सील तोड़ी

फिर मैंने देखा कि उसकी चूत बिल्कुल साफ गोरी थी और एकदम मुलायम थी और उसको देखकर मुझे लग रहा था कि शायद इसे किसी ने भी एक बार भी नहीं चोदा होगा, जिससे उसकी चूत की सील अब तक पैक थी। मैंने फिर उसकी चूत में अपनी दो उँगलियों को डाल दिया और बहुत धीरे से अंदर बाहर करने लगा। लगातार कुछ देर तक ऐसा करने से उसकी चूत अब बहुत गरम हो गई थी और उसके मुहं से वो आवाजे आने लगी थी उफफफ्फ़ आहह्ह्ह स्ईईईईई और तब तक मेरे हाथ में बहुत गरम गरम महसूस हुआ। फिर मैंने जब कुछ देर बाद अपनी उंगली को चूत से बाहर निकाला। तब मैंने देखा कि उसकी चूत से ऊँगली के साथ साथ पानी भी निकल गया। मैंने फिर उसके ब्लाउज की तरफ अपना एक हाथ आगे बढ़ाया और मैंने जल्दी से उसके ब्लाउज और ब्रा को खोल दिया। तब मैंने देखा कि उसके बूब्स भी बहुत गोरे बिल्कुल टाईट और उनकी निप्पल एकदम तनी हुई थी।

दोस्तों उसकी प्यासी चूत, गोरा बदन, छोटे आकार के गोरे गोरे बूब्स मुझे अपनी तरफ अब आकर्षित कर रहे थे और में वो सब देखकर बिल्कुल पागल हो गया था। अब में उसके ऊपर टूट पड़ा और उसके बूब्स को ज़ोर ज़ोर से चूस चूसकर निचोड़ने, दबाने लगा था और चाटने लगा था, जिसकी वजह से वो अपने हाथ से मेरे सर को पकड़कर अपने बूब्स के ऊपर दबाने लगी और दबाते दबाते हुए वो उह्ह्ह्ह आह्ह्ह्ह करती रही। करीब 15 मिनट के बाद मैंने सोचा कि अब इसे में चोद डालता हूँ। दोस्तों मेरा लंड तो बहुत पहले से ही उसकी चूत में जाने को तैयार था।

फिर में उठा और मैंने अपनी पेंट को खोलकर अपना लंड बाहर निकाल लिया, जैसे ही मेरा लंड बाहर निकला तो वो लंड को अपनी फटी हुई आखों से घूरकर देखते हुए मुझसे बोलने लगी कि बाप रे क्या इतना बड़ा? मैंने तो कभी नहीं देखा। यह तो मेरी उम्मीद से भी ज्यादा लंबा और बहुत मोटा है। फिर मैंने उससे पूछा कि क्या शाहबाज़ तुम्हें कभी नहीं चोदता? तो वो बोली कि नहीं उसकी कोई समस्या है, जिसकी वजह से वो अभी मेरे साथ सेक्स करने को तैयार नहीं है, लेकिन उसने तो मुझे बहुत बार उसका लंड दिखाया जरुर है और वो तो इससे आधा भी नहीं है, अगर यह इतना बड़ा, मोटा लंड मेरे अंदर गया तो यह मेरी चूत को जरुर फाड़ देगा, क्योंकि मेरी चूत अभी बहुत छोटी है और मुझे उसके बाद बहुत दर्द होगा। फिर मैंने उससे कहा कि तुम किसी भी बात की बिल्कुल भी टेंशन मत लो, में हूँ ना तुम्हारे पास। फिर उसने कहा कि ठीक है, लेकिन तुम थोड़ा आराम से करना। मैंने कहा कि हाँ ठीक है और फिर मैंने जल्दी से उसके दोनों पैरों को अपने कंधो पर रखकर में ठीक उसके बीच में बैठ गया और फिर मैंने उसकी चूत के बीच अपना लंड सटा दिया तो वो मेरे गरम मोटे लंड से थोड़ा घबरा गई।

फिर मैंने उसे समझाकर थोड़ी तसल्ली दी और अपना लंड उसकी चूत के मुहं पर रखकर मैंने अचानक से एक ज़ोरदार धक्का मार दिया, जिससे वो उछल पड़ी और चिल्लाने लगी उफ़फ्फ़ आह्ह्ह्हह्ह, लेकिन वो लंड के उस धक्के की वजह से ऊपर की तरफ चली गई, जिससे मेरा लंड अंदर नहीं गया और फिसलकर बाहर ही रह गया। फिर मैंने उससे कहा कि तुम्हारे पास तेल है ना, जाओ थोड़ा सा तेल लेकर आओ। फिर वो उठी और तेल लेकर आ गई। फिर मैंने अपने हाथ में थोड़ा सा तेल ले लिया और अपने लंड पर लगा लिया। सीमा यह सब चुपचाप से देख रही थी। फिर मैंने उसे दोबारा से नीचे लेटा दिया और चूत पर भी बहुत सारा तेल लगाकर मालिश की और एक बार फिर से अपना लंड उसकी चूत के मुहं पर रखकर मैंने उसकी जांघो को कसकर पकड़ लिया और अपने लंड से उसकी चूत पर एक ज़ोर से धक्का मार दिया, जिसकी वजह से मेरा लंड फिसलकर उसकी चूत को फाड़ता हुआ अंदर चला गया, लेकिन वो उस दर्द की वजह से एकदम से छटपटा गई और रोने लगी, वो ज़ोर ज़ोर से आह्ह्ह्हहह उफफफ्फ़ प्लीज अब इसे बाहर निकाल दो ऊईईईइ माँ में मर जाउंगी, प्लीज मुझे बहुत दर्द हो रहा है स्स्सीईइ मुझे बहुत दर्द है, प्लीज थोड़ा जल्दी करो तुम इसे बाहर कर लो।

मैंने थोड़ी देर अपना लंड उसी तरह उसकी चूत में रखा और में बिल्कुल शांत रहा और उसको सहलाता रहा और उसके शांत होने का इंतजार करता रहा और करीब पांच मिनट बाद मैंने महसूस किया कि वो अब थोड़ा सा शांत हुई, लेकिन उस वक़्त तक मेरा पूरा लंड खून से भर चुका था और उसकी चूत से बहुत तेजी से खून बाहर आ रहा था, जिसका मतलब साफ था कि उसकी चूत अब फट चुकी थी। में बहुत खुश था क्योंकि मैंने आज उसकी सील को तोड़ दिया था और तभी मैंने एक और ज़ोरदार झटका मारा और अपना पूरा का पूरा लंड उसकी फटी चूत के अंदर डाल दिया और इस बार भी वो छटपटा गई और चिल्लाने लगी, खून भी ज्यादा निकल रहा था, जिसकी वजह से में थोड़ा सा डर गया था और वो चिल्ला रही थी, हउफफफ्फ़ माँ मर गई आह्ह्ह्ह माँ और खून के देखकर में करीब दस मिनट तक वैसे ही रहा और कुछ देर मैंने देखा कि वो अब थोड़ा शांत हुई थी और खून का गिरना भी कम हुआ।

फिर में धीरे धीरे अपना लंड उसकी चूत के अंदर बाहर करने लगा, लेकिन थोड़ी देर बाद मैंने अपने लंड के धक्को की रफ़्तार को बढ़ा दिया और अब में उसे ज़ोर ज़ोर से अपना लंड चूत के अंदर बाहर करने लगा, जिससे फच फचा फच की आवाज़ आ रही थी और इस बार खून के जगह उसकी चूत से पानी बाहर निकल रहा था, मतलब वो हर एक झटके में झड़ रही थी और चिल्ला चिल्लाकर वो बोल रही थी आहह्ह्ह्ह उहह्ह्ह्हह्ह प्लीज थोड़ा धीरे धीरे करो अफफफफ और वो अब अपनी कमर को ऊपर नीचे कर रही थी।

दोस्तों करीब 30 मिनट के बाद मेरा लंड शांत हुआ और मेरा वीर्य निकल गया, लेकिन मैंने अपना वीर्य अंदर ही छोड़ दिया। उसके बाद दस मिनट तक में और सीमा बिस्तर में ऐसे ही एक दूसरे से लिपटकर पड़े रहे। मैंने उसको बहुत प्यार किया और उसके छोटे छोटे बूब्स को दबाया चूसा और उसके बदन के पूरे मज़े लिए। फिर में उठा और बाथरूम चला गया। जब तक मैंने देखा कि बिस्तर जो पानी और खून से खराब हो गया था, उस बिस्तर की चादर को वो उठाकर कमरे से बाहर ले जाने लगी, लेकिन वो ठीक से चल नहीं पा रही थी और वो बहुत धीरे धीरे लचक कर चल रही थी और उसके पैर ज़मीन से जल्दी उठ रहे थे। यह सब शायद उसकी चूत फटने का नतीजा था, क्योंकि मैंने आज उसकी वर्जिन चूत को फाड़कर उसकी चाल को एकदम ही बदल दिया था। में उसकी बदली चाल को देखकर मन ही मन बहुत खुश था और मुझे इस बात की भी बहुत ख़ुशी थी कि मैंने एक वर्जिन चूत को चोदकर उसकी सील को तोड़ दिया और उसको अपनी चुदाई से पूरी तरह से संतुष्ट किया। हम दोनों ही बहुत खुश थे ।।