पड़ोस वाले चाचा चाची के गुलछर्रे

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शीला को खुश करने के बाद मेरी जिंदगी बदल गई, उन तीन दिन के बाद भी मैं और शीला बहुत बार मिले और बहुत मजे करते रहे, शीला मुझसे खुश थी। एक दिन अचानक शीला ने मुझसे कहा- मेरू एक पड़ोसन है, मेरी अच्छी सहेली है, शादीशुदा है और अपने पति के साथ रहती है, उसका नाम रूपाली है, (बदला हुआ नाम) रूपाली ने मुझे और तुम्हारे साथ देखा था तो मैंने भी हमारे संबंधों के बारे में उसको बता दिया था।

रूपाली का पति एक प्राइवेट कंपनी में काम करता है और वह रूपाली को समय नहीं दे पाता था इसलिए वो उदास रहने लगी थी और अपने इस दुःख के बारे में उसने शीला को बताया था, तब शीला ने उसके मन को समझ कर मेरे बारे में बताया कि अगर वो चाहती है तो वो मेरे से अपनी खुशी ले सकती है।

रूपाली ने सोचकर शीला को हाँ में जवाब दिया।

एक दिन शाम को मुझे शीला का फोन आया, उसने अगले दिन सुबह मुझे अपने घर पर बुलाया। मैं अगले दिन सुबह आठ बजे शीला के घर गया, शीला घर पर अकेली थी, उसने मुझे बताया- रूपाली को तुमसे मिलना है।

मैंने उसको बोला- ठीक है।

पर शीला पहले तो अपनी प्यास बुझाने के लिए आतुर थी, वो मुझे छोड़ने वाली थी, वो मुझे बेडरूम में ले गई और बेड पर धक्का देकर मेरे ऊपर चढ़ गई, मेरी पेंट उतार कर मेरे लंड को अपने मुँह में लेकर चूसने लगी। करीब 25 मिनट बाद मैं उसके मुँह में झड़ गया।



मेरा पूरा रस शीला ने पी लिया, फ़िर शीला ने मुझे फ्रेश होने को कहा और मेरे लिए चाय लेकर आई। चाय पीने के बाद करीब दस बजे हम रूपाली के घर पहुँचे।

मैंने जब उसको देखा तो देखता ही रह गया, उसने मस्त गुलाबी रंग की साड़ी पहनी हुई थी, हल्का सा मेकअप किया था। शीला ने उससे मेरा परिचय कराया, उसके बाद शीला अपने घर चली गई।

हम दोनों बाहर के ही कमरे में बैठकर बातें करने लगे। पहले वो शरमा रही थी, फ़िर धीरे धीरे खुल कर बातें करने लगी, वह मेरे लिये बादाम डाला हुआ दूध लेकर आई, मैंने आधा दूध पीया और ग्लास रूपाली को दे दिया।

रूपाली ने बाकी का दूध पी लिया और ग्लास रखने रसोई में गई। मैं भी उसके पीछे गया और उसको पीछे से पकड़ लिया।

वो थोड़ा चौंक गई पर मुखे देख कर हंस दी, मैंने उसको पीछे से उसके पेट पर कस कर पकड़ लिया और उसकी गर्दन पर चूमने लगा, चाटने लगा, उसके पेट पर हाथ घुमाता रहा।

वो पांच मिनट में गर्म हो गई और पलट कर मुझसे लिपट गई। उसके चेहरे को मैंने ऊपर किया तो देखा, उसकी आँखों में पानी था। मैंने उसको पूछा- क्या हुआ?

उसने कहा- मैंने इतनी ख़ुशी पहले महसूस नहीं की थी कभी, मुझे बहुत अच्छा लग रहा है।

मैं उसे बाहों में लेकर कमरे में ले आया और उसके होठों को चूमने लगा, थोड़ी देर बाद मैंने उसकी साड़ी का पल्लू नीचे कर दिया। क्या लग रही थी वोह ! उसका बदन बहुत ही कसा हुआ था, मैंने उसके ब्लाउज़ को उतारा और ब्रा के ऊपर से उसकी चूचियाँ दबाने लगा और होठों को चूमने लगा।



वह बहुत गर्म होने लगी थी, मेरे मुंह में अपनी जुबान अन्दर डाल रही थी, मुझे जोरों से अपने ऊपर खींच रही थी। मैंने उसकी साड़ी निकाल दी। अब वह सिर्फ ब्रा और पेंटी में थी, गजब की लग रही थी। फ़िर हम अन्दर बेडरूम में गए और बेड पर लेट कर एक दूसरे को चूमते रहे।

थोड़ी देर बाद मैंने उसकी ब्रा हटा दी और उसके उरोजों को देखा और उसके चुचूक चूसने लगा। जैसे ही मैंने उसके निप्पल को दाँतों में पकड़ा, वह जोर से सांस लेने लगी, ऐसा लग रहा था जैसे उसके साथ काफ़ी दिन के बाद ऐसा किया जा रहा हो, वो बहुत ज्यादा गर्म हो रही थी, वो जोर जोर से मेरे बदन पर, बालों में हाथ घुमा रही थी और आहें भी भर रही थी।

मुझे पता चल गया था कि अब इसको ज्यादा तरसाना अच्छा नहीं होगा, मैंने उसकी चूत पर पेंटी के ऊपर से ही हाथ घुमा रहा था और उसके निप्पल चूस रहा था।

मुझसे भी अब रहा नहीं जा रहा था, मैं उसकी चूत की खुशबू लेना चाहता था, मैं उसकी पैंटी के ऊपर से ही उसकी चूत पर अपनी नाक दबा रहा था।

क्या खुशबू थी ! नशा सा चढ़ जाए, ऐसा मजा आ गया ! ऐसी खुशबू थी !

मैंने उसकी पेंटी निकाल दी, मैंने देखा कि उसकी चूत पर थोड़े से बाल थे और उसकी चूत मस्त गुलाबी रंग की थी। देखकर मुझसे रहा नहीं गया और अपनी जुबान उसकी चूत पर घुमाने लगा।

5 मिनट में ही वह जोर से अपने बदन ऊपर नीचे करने लगी और अपनी चूत पर मेरा सिर दबा रही थी और वैसे ही झड़ गई।

फ़िर थोड़ी देर वो वैसे ही पड़ी रही, दस मिनट बाद वो उठी और मेरी पैंट उतार कर मेरे लंड को हाथों में लेकर सहलाने लगी।

मैंने उसको मुँह में लेने को कहा पर उसको उसके बारे में पता नहीं था, इसलिये उसने हाथों से ही सहला कर उसको तैयार कर दिया। मेरा लंड देख कर वो थोड़ी सी डर गई थी पर उसने मुझे कुछ नहीं कहा, पर मैं समझ गया था।

मैं उसकी चूत पर लंड घुमाने लगा और अहिस्ते से उसकी चूत में घुसा दिया।

मेरा आधा लंड अन्दर जाते ही उसकी चीख निकली इसलिये मैं उतना ही लंड अन्दर बाहर करने लगा। थोड़ी देर बाद वो भी मेरा साथ देने लगी और अपने बदन को आगे पीछे कर रही थी मानो उसकी पहली रात हो, ऐसे मजा ले रही थी।

करीब 10 मिनट बाद मेरा भी समय आ गया था, मैंने अपने लंड को बाहर निकाला और उसके पेट पर मैंने मेरा पूरा माल गिरा दिया, उसने वो सब अपने बदन पर फैला लिया और मुझे अपने ऊपर जोर से खींच लिया और वैसे ही हम सो गए !

फ़िर हम दोपहर को तीन बजे के करीब सोकर उठे और नहाने चले गए। हम दोनों एक साथ नहाने लगे, उसने मेरे बदन को साबुन लगा कर मुझे प्यार से नहलाया, मैं जान गया था कि उसके मन में भी कुछ है जैसे कि उसको वहाँ पर भी कुछ करूँ, मैं उसी वक़्त नीचे बैठ गया और उसकी योनि में अपनी जुबान घुसा कर चूसने लगा।

लगभग 15 मिनट बाद वह फ़िर से झड़ गई और मैंने उसका माल पूरा चाट लिया। फ़िर हम नहा कर बाहर आ गए और थोड़ी देर बाद हम खाना खाकर थोड़ी देर सो गए।