मिश्रा जी का बूढा लंड और मेरी मस्त चुदाई

0
24172

यूँ तो अपनी 28 साल की उम्र और तिन साल के रंडी के पेशे में मैंने 500 जितने लंड देखे थे लेकिन जिस बूढ़े ने मुझे पर सो चोदा वह एक अलग ही अनुभव था, यह बूढा कुछ 55 का होगा और मैं और शालिनी जब सिटी के रेड लाईट एरिया में लटार लगा रहे थे तब से हमें देख रहा था. शालीनी मुझ से ज्यादा खुबसूरत थी और उसके कई हाई-फाई क्लाइंट थे.
मुझे क्लाइंट जुटाने में तकलीफ पड़ जाती थी क्यूंकि मैं अब करीबन 30 की हो चली थी, सभी को 18 की चूत चाहिए होती है भले ही वह खुद 81 के हों. मुझे कुछ 4 चक्कर हो गयें थे लेकिन आज भी मुझे कोई कस्टमर नहीं मिला था. वह बूढा अब भी वही खड़ा था और मुझे घूर रहा था. मैंने उसके पास जा के कहाँ “अंकल क्या घूर रहे हो रस्ता भटक गए हो क्या.? “

बूढे को तो चूत चाहिए थी

बूढ़े ने मेरी तरफ देख के कहाँ, मुझे तुम से कुछ काम है, पैसे उतने ही लेना जितना तुम लेती हो…और अगर तुम चाहो तो ज्यादा भी दे सकता हूँ. मेरी पत्नी को मरे अब 12 साल हो गए हे और मेरे से लंड की पीड़ा बर्दास्त नहीं होती. मैंने इस बूढ़े को ऊपर से निचे तक देखा. यह एक पतला, दुबला और कमजोर दिख रहा इन्सान था. मैंने एक पल की लिए सोचा की क्या यह बूढा लंड उठा भी पाएगा. लेकिन फिर दुसरे ही पल मुझे ख्याल आया की मुझे भी घर का किराया और राशन लाना है. मैंने अंकल जी को कहा, “चलिए अंकल जी.”
“मेरा नाम अरविन्द मिश्रा है…” बूढा शायद अंकल जी नहीं कहेलवाना चाहता था. मैंने उस बूढ़े को लेकर अपने फिक्स्ड गेस्ट हॉउस के तरफ चलना चालू किया. रस्ते में ही मिश्रा जी ने अपने जेब से 500 का नोट निकाला और मुझे दे दिया. मेरा रेट 300 था और मैंने उन्हें 200 वापस देने के लिए पर्स खोला लेकिन वह बोले, “रख लो सभी…बस मुझे खुस कर देना आज. मेरे लंड की प्यास बहुत पूरानी है.” हम लोग रिसेप्शन से चाबी ले के रूम में घुसे और अंदर जाते ही मैंने कपडे उतारने के लिए हाथ बढाया लेकिन मिश्रा जी ने मुझे कहा, “अभी नहीं, पहले मुझे जी भर के प्यार कर लेने दो.” एक पेशेवर रंडी के लिए यह शब्द “प्यार” अजीब होता है, वैसे वोह हमेशा प्यार बाँट रही होती है लेकिन उसका प्यार वासना से भरा होता है.
मुझे प्यार करते करते मिश्राजी का लंड उठने लगा

उन्होंने मुझे अपनी बाहों में लिया और मेरे गले के उपर उन्होंने मस्त किस कर दी, मुझे उनके होंठो से अजीब आनंद आ रहा था. मैंने सिसकारी निकाली और मिश्रा जी का हाथ मेरी कमर के इर्दगिर्द लपट ग़या. वह मेरे कमर को पकड़े मुझे गले, कंधे और होंठो पर चुम्मे देने लगे. मेरी चूत तो हमेशा लंड को आवकार देने के लिए तैयार होती है लेकिन आज मुझे चूत के अंदर अजब सी खुजली हो रही थी. यह वही खुजली थी, जब मैं रंडी नहीं थी और जिसे महेसुस करती थी. मेरे स्तन पर मिश्रा जी के हाथ थे और मैं उनका लंड सहेला रही थी. मेरे आश्चर्य के बिच इस उम्र में भी मिश्रा जी का हथियार एकदम से उत्तेजित होने लगा और कुछ ही सेकंड्स में तो वह पूरा खड़ा हो चूका था. मैंने उनकी पेंट की क्लिप खोल के लंड को बहार निकाल दिया. मिश्रा अंकल नी भी मेरी ब्लाउज खोल दी और वही मर्दाना स्टाइल से मेरी ब्रा की हुक खोल दी. मेरे स्तन मस्त अकड़ चुके थे और उनके निपल्स भी मस्त नुकीले बन चुके थे. मिश्रा जी ने अपने दांत मेरे स्तन पर गड़ाने चालू किये और वो मस्त तरीके से स्तन की चुसाई करने लग पड़े.
मिश्रा जी का लंड बड़ा था मेरी चूत तो जैसे की फटने को थी

मेरा हाथ जैसे जैसे मिश्रा जी के लौड़े पर घूमता था वो और भी बड़ा होता जा रहा था और कुछ देर में तो वो 9 इंच जितना तन गया. एक बूढ़े का लौड़ा इतना लम्बा भी हो सकता है मुझे कतई अंदाजा नहीं था. मिश्रा जी ने अपने स्तन चूसने के कार्यक्रम पर ब्रेक लगाईं और मुझे लंड चूसने के लिए कहा. मैं ऐसे लंड नहीं चुस्ती थी लेकिन यह लौड़े का सौन्दर्य और ताकत मुझे उसकी चुसाई करने से रोक नहीं पाया. मेरे मुहं के अंदर मिश्रा जी का पूरा औजार ठूंस गया. मेरे गाल दोनों तरफ से फुले हुए लग रहे थे. मिश्रा जी धैर्य से मेरे मुहं में अपना लौड़ा धकेलने लगे. दुसरे मर्दों की तरह वोह जरा भी जल्दबाजी नहीं कर रहे थे, वरना कुछ लोग तो चुदाई ऐसे करते है की उनकी गांड में टाइम बम लगा हों. मैं भी मिश्रा जी को ज्यादा से ज्यादा मजा देने की कोशिश करने लगी.मिश्रा जी मेरी तरफ प्यार से देख रहे थे, जैसे कोई अपनी बीवी को चोदता हों. मुझे भी मिश्रा जी के लिए आदर होने लगा और मैं उनका लंड बहार निकाल के हिलाने लगी, लंड 9 इंच की लम्बाई में पूरा तन चूका था और चौड़ाई कम से कम ढाई इंच. मिश्रा जी ने मुझे अपने दोनों हाथ से जांघ से उठाया. मेरे स्तन उनके कंधे के ऊपर थे. उन्होंने मुझे पलंग में लिटाया. मैंने अपने पर्स से कंडोम निकाला और उनके लंड के ऊपर पहना दिया. मिश्रा जी ने मेरे टाँगे खोल दी और लौड़े को मेरी चूत के छेद पर सेट कर दिया. लौड़े की मोटाई मुझे छेद पर साफ़ महेसुस हो रही थी. मिश्रा जी ने जरा अपनी जांघे से झटका दिया और मेरी चीख निकल पड़ी. बहुत लौड़े आके इस चूत को ठोक गए लेकिन मिश्राजी लम्बे और चौड़े दोनों थे.
मेरी मस्त चुदाई

मिश्रा जी एक मिनिट थोड़े रुके और धीमे से चूत चोदने लगे और फिर वो कभी नहीं रुके. उनका लम्बा तगड़ा लौड़ा चूत को कूट कूट के ठोकता रहा. मिश्रा जी मेरे स्तन और होंठो पर अपना हाथ घुमाते थे और साथ में मेरी गांड के छेद पर भी ऊँगली ले जाते थे. मिश्रा जी का चुदाई कार्यक्रम कुछ 5 मिनिट तक चलता रहा इसी पोजीशन में और फिर उन्होंने मुझे उल्टा लिटा दिया. अब वह मेरी डौगी स्टाइल में ठुकाई करने लगे. उनका लंड इस पोजीशन में चूत की गहराई तक जा रहा था और मुझे असीम आनंद मिल रहा था.

मेरा दर्द गायब हो चूका था और मैं भी अपनी गांड हिला के मिश्रा जी से मस्त चुद रही थी. मिश्रा जी ने झटके और भी तीव्र कर दिएँ और वह गांड के उपर चमाट भी दे रहे थे. मेरी चूत के भीतर तभी मुझे गर्म पानी का अनुभव हुआ जो की मिश्रा जी का एकदम घाटा वीर्य था, उनकी बात सच थी उनके लंड को बहुत समय से चूत का सुख नहीं मिला था तभी तो उनके लौड़े से 3 बार की चुदाई में निकलता है उतना वीर्य निकल गया. उन्होंने लौड़े को धीरे से बहार निकाला और बाथरूम में जा के अपने लौड़े और जांघो को धो के बहार आ गए. मैं वही लेटी थी, मिश्रा जी मेरे पास आये और उन्होंने मेरे स्तन और होंठो पर दुबारा अपने होंठ रख दिएँ. मैं एक मिनिट के बाद उठ खड़ी हुई और चूत और गांड धो के बहार आ गई. मिश्रा जी ने अपना मोबाइल नम्बर मुझे दिया और कहा की वो मेरे पास रेग्युलर आयेंगे….सच कहूँ तो मुझे भी मिश्रा जी जैसे लौड़ो से ही चुदना होता है लेकिन रंडियों के पास अक्सर लोग टेस्टिंग के लिए आते है ताकि उनकी मर्दानगी सुहागरात के दिन हलकी ना पड़े……!!!