पापा के दोस्त ने सील तोड़ी

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हेल्लो दोस्तों, मैं भारती गुलाटी आप सभी का नॉन वेज स्टोरी में बहुत बहुत स्वागत करती हूँ। मैं पिछले कई सालों से नॉन वेज स्टोरी की नियमित पाठिका रहीं हूँ और ऐसी कोई रात नही जाती तब मैं इसकी रसीली सील तोड़ी चुदाई कहानियाँ नही पढ़ती हूँ। आज मैं आपको अपनी स्टोरी सूना रही हूँ। मैं उम्मीद करती हूँ कि यह कहानी पापा के दोस्त ने सील तोड़ी सभी लोगों को जरुर पसंद आएगी।

मेरी स्टोरी बहुत ही सेक्सी है। कुछ महीने पहले मेरे घर के बगल एक नया परिवार आकर रहने लगा था। वो लोग बहुत अच्छे थे। वो पति पत्नी साथ में रहते थे और उनके अभी कोई बच्चा नही हुआ था। उनका नाम विवेक और आरती था। वो लोग दिल्ली के रहने वाले थे पर अभी हम लोगो के आगरा शहर में आकर बस गये थे। विवेक एक उम्र दराज आदमी था और आगरे के मशहूर होटल ओबेराए अमर विलास में एक्सेक्यूटिव शेफ था। मेरे पापा खाने पीने के बहुत शौक़ीन आदमी थे। हमारे पड़ोसी विवेक और आरती अक्सर हमारे परिवार को डिनर पर बुलाते थे। धीरे धीरे विवेक और आरती से मेरे घर वालो की खासकर पापा से अच्छी दोस्ती हो गयी। कुछ दी दिनों में विवेक मेरे पापा का अच्छा दोस्त बन गया।

वो मेरे घर आने लगा और कई बार उसने हम लोगो के लिए तरह तरह की डिस बनाई। जब भी विवेक मेरे घर आता तो मेरा हाल चाल जरुर पूछता। धीरे धीरे वो मुझे और मैं उसे पसंद करने लगी। कुछ दिन बाद मेरे पापा का जन्मदिन था। पापा ने अपने सबसे अच्छे दोस्त विवेक और आरती को बुलाया और अन्य महमानों को भी बुलाया। शाम को केक कटने के बाद सब लोग मजे करने लगे। विवेक की वाईफ आरती मेरी माँ से बात करने लगी। कुछ देर में ड्रिंक शुरू हो गये और अपने जन्मदिन पर मेरे पापा से बहुत शराब पी ली और नशे में धुत हो गये। मेरे पापा का सबसे ख़ास दोस्त विवेक मुझसे बात करने लगा। वो मेरे लिए भी वाइन ले आया।

“लो भारती!!…पियो!” पापा का दोस्त विवेक बोला

“…..नही मैं शराब नही पीती हूँ” मैंने कहा

“अरे चलो भी ये वाइन है। ये शराब थोड़े ही नही है….लो पियो!” विवेक बोला। उसके बहुत जोर देने पर मैंने वाइन पी ली और धीरे धीरे हम दोनों काफी वाइन पी गयी। हम दोनों खामोश थे और एक दुसरे को ताक रहे थे।

“आई लव यू भारती!!” इतने में मेरे पापा का खास दोस्त विवेक बोला

मैंने भी उसे आई लव यू बोल दिया। हम किस करने लगे। मेरी उम्र सिर्फ १९ साल थी। आज तक मैं किसी भी लड़के से चुदी नही थी। लगता है वाइन मुझे काफी चढ़ गयी थी। ३० साल की उम्र वाला विवेक मेरे पास आ गया और मुझे कंधों से उसने पकड़ लिया और मेरे होठ पर उसने अपने होठ रख दिए। मुझे भी ये सब अच्छा लग रहा था। मैं भी उसे किस करने लगी। मेरे घर में पार्टी चल रही थी और घर मेहमानों से खचा खच भरा हुआ था। वूफर और साउंड पर तेज हिंदी फ़िल्मी गाने बज रहे थे। मेरी माँ विवेक की वाइफ आरती से बात करने में बिसी थी और मैं इधर विवेक से इश्क लड़ाने में बिसी थी। धीरे धीरे हम एक दूसरे को होठ पर किसने करने लगी।

हमे कोई देखने वाला नही था, क्यूंकि घर में सब तरफ मेहमान ही मेहमान थे। मैं विवेक के दिल की बात समझ गयी थी। वो मुझे चोदना चाहता था। इधर मैं भी उससे प्यार करने लगी थी, इसलिए मैं भी उससे चुदवाने के मूड में थी।



“उपर चले……यहाँ भीड़ बहुत है!!” विवेक बोला

“हाँ….ठीक है!” मैंने कहा

हम दोनों घर की छत पर आ गए। यहाँ पर सन बाथ वाली लम्बी लम्बी बेंचेस पड़ी थी, हम लोग अक्सर शाम को इस पर लेट पर आराम करते थे। मैं और विवेक उस लम्बी सन बाथ वाली बेंचेस पर आ गये और प्यार करने लगे। विवेक ने मुझे कसकर पकड़ लिया और मेरे होठ पीने लगा। मैं भी उससे प्यार करने लगी। मैंने एक मस्त सुनहरे रंग का ब्लाउस और लाल रंग की स्कर्ट पहन रखी थी। धीरे धीरे हम आपस में प्यार करने लगे।

“ओह्ह्ह….भारती!! तुम बहुत खूबसूरत हो….आई लव यू!!” मेरे पापा का सबसे ख़ास दोस्त विवेक बोला और उसने मेरे ब्लाउस पर अपना हाथ रख दिया। मैं बिलकुल जावन माल थी और मेरा जिस्म काफी भरा और गदराया हुआ था। मेरे मम्मे ३६” के थे। विवेक जोर जोर से मेरे ब्लाउस पर हाथ रखकर मेरे दूध दबाने लगा।

पापा के दोस्त ने सील तोड़ी

“आह…. “आआआआअह्हह्हह….ईईईईईईई…विवेक मुझे तुम बहुत अच्छे लगते हो!!..आई लव यू!!” मैंने भी कह दिया

उसके बाद तो वो तेज तेज मेरे मम्मे दबाने लगा और उसने मुझे सन बाथ वाली लम्बी चेयर पर लिटा दिया और मेरे सिर के नीचे तकिया लगा दी। विवेक मेरे उपर झुक गया और एक बार फिर से मेरे होठ पीने लगा। कुछ देर बाद उसने मेरा ब्लाउस खोल दिया और निकाल दिया, फिर मेरी ब्रा भी उसने निकाल दी। मेरे नर्म नर्म मस्त मस्त चुचे ठीक उसके सामने थे। विवेक मुझ पर लेट गया और मजे से मेरे दूध पीने लगा। मैं मचल गयी और उसके बालो में मैंने अपना हाथ डाल दिया और उँगलियां उसके बालों में फिराने लगी।

“विवेक ……क्या तुम मुझे चोदना चाहते हो???” मैंने भारी पलकों से कहा

“हाँ ….भारती! तुम बहुत सुंदर हो। आज मैं तुमको कसके चोदना चाहता हूँ!” वो बोला और एक बार फिर से नीचे झुक गया और मेरे दूध मजे से पीने लगा। मेरे घर की इस छत पर कोई नही था मेरे और विवेक के सिवा। मेरा घर ४ मंजिला था इसलिए यहाँ छत पर कोई मेहमान नही आने वाला था क्यूंकि पार्टी नीचे ग्राउंड फ्लोर पर चल रही थी। हम दोनों अकेले थे, इसलिए मेरे पापा का सबसे ख़ास दोस्त मुझे आराम से चोद सकता था। विवेक बड़ी अच्छी तरह से मेरी चूचियां पी रहा था। कुछ ही देर में मैं बहुत जादा चुदासी हो गयी थी, मेरी चूत में जैसे आग सी जलने लगी थी। मैं गर्म गर्म आहे भर रही थी। मेरा दांया दूध पीने के बाद विवेक ने मेरा बाया मम्मा मुंह में भर लिया और मजे से चूसने लगा। मैं बार बार “ओह्ह्ह्हह्ह…अई..अई..अई….अई..मम्मी…..” चीख रही थी। मेरी माँ विवेक की वाईफ से नीचे बात करने में मस्त थी। मेरे पापा तो शराब के नशे में टल्ली हो चुके थे और यहाँ उसकी लड़की उनके ही दोस्त से चुदवाने जा रही थी। कुछ देर तक विवेक ने जी भर के मेरे रसीले रबर जैसे मुलायम मम्मे पिए, फिर मेरी स्कर्ट का हुक उसने खोल दिया और शर्ट निकाल दी। विवेक मेरी चूत को काली रंग की पेंटी के उपर से ही चाटने लगा तो मुझे बहुत अच्छा लगा। कुछ देर बाद उसने मेरी काली पेंटी भी निकाल दी और मैं पूरी तरह से नंगी हो गयी। विवेक ने एक एक करके अपनी जींस और सफ़ेद शर्ट निकाल दी और अपना कच्छा उसने निकाल दिया और पूरी तरह से नंगा हो गया।

जहाँ नीचे ग्राउंड फ्लोर में काफी गर्मी थी, वही उपर छत का मौसम बड़ा सुहावना था। ठंडी हवा बड़ा सकून पंहुचा रही थी। विवेक मेरी चूत पर लेट गया और मजे लेकर मेरी बुर चाटने और पीने लगा। मैं सिस्कारियां लेने लगी। पापा का दोस्त मजे से मेरी चूत को पी रहा था। मेरी चूत का दाना काफी उठा हुआ था, विवेक मजे से मेरे चूत के दाने को चाट और चूम रहा था। मेरी चूत का रंग चोकलेटी जैसा था और विवेक मजे से मेरी बुर पीने में मस्त था। वो अपनी निकाल निकालकर मजे से मेरा भोसड़ा पी रहा था। मैं “उ उ उ उ ऊऊऊ ….ऊँ..ऊँ…ऊँ अहह्ह्ह्हह सी सी सी सी.. की आवाज निकाल रही थी। इसी बीच विवेक ने अपना मोटा लंड मेरी चूत में डाल दिया। मैंने अपने आप अपने दोनों पैर और जांघे खोल दी और मेरे पापा का सबसे खास दोस्त विवेक ही मुझे चोदने लगा। वो तेज तेज मेरी चूत में लंड देने लगा।

मैं भी मस्ती से चुदवाने लगी। विवेक के चोदने से मेरी बुर के दोनों होठ बार बार खुलते थे और बार बार बंद हो जाते थे। वो मुझे जोर जोर से पेल रहा था। सच में मुझे बहुत अच्छा लग रहा था। बहुत मजा मिल रहा था। बड़ी नशीली रगड़ थी पापा के दोस्त के लौड़े की। बहुत सुख मुझे मिल रहा था दोस्तों। ३० साल का विवेक हचर हचर करके मेरे जैसे १९ साल की कच्ची कली को चोद रहा था। उसके मोटे से लम्बे लौड़े पर मेरा पूरा शरीर थिरक रहा था और डांस कर रहा था। जैसे लग रहा था वो कोई इंजन मेरी चूत में डाल के चला रहा हो। वो मेरी बुर पर बड़ी मेहनत कर रहा था। वो हच हच करके मुझे चोद रहा था। जैसे वो अपना लौड़ा मेरी बुर में डालता था, लौड़ा हच्च से देता था मैं २ ४ इंच आगे सरक जाती थी। फिर जैसे वो लौड़ा निकलता था मैं २ ४ इंच वापिस पीछे आ जाती थी। वो जोर जोर से हच हच करके मेरी बुर में लौड़ा अंदर बाहर कर रहा था। वो इतनी तेजी से लौड़ा अंदर बाहर कर रहा था बार बार मैं २ ४ इंच आगे और २ ४ इंच पीछे सरक जाती थी। घंटों यही सिलसिला चला।


पापा के दोस्त ने सील तोड़ी

कुछ देर बाद उसने अपना मॉल मेरी चूत में ही छोड़ दिया। वो मेरे उपर लेट गया और हम दोनों प्यार करने लगे। मेरी चूत में थोड़ा दर्द हो रहा था क्यूंकि मेरे पापा का दोस्त विवेक ने मुझे बहुत तेज तेज ठोंका था।

“तुम्हारा लौड़ा तो बहुत बड़ा है!!…आज तक मैंने कभी इतना मोटा लौड़ा नही खाया!!” मैंने बोली

“तुमको पसंद आया???” विवेक ने पूछा

“हाँ….बहुत!” मैंने कहा

“क्या तुम अपनी बीबी आरती की ठुकाई भी इसी तरह करते हो??” मैंने अपने से ११ साल बड़े विवेक से पूछा

“हाँ…मैं उसे इसी तरह तेज तेज लेता हूँ। मेरी वाइफ आरती को धीमे धक्के पसंद नही है, इसलिए मैं उसे तेज तेज धक्के देकर उसकी चूत लेता हूँ” विवेक बोला

फिर वो मेरी नंगी चूत की तरफ देखने लगा। मेरी बुर उसके लंड के ताबड़तोड़ हलने से पूरी तरह से कुचल गयी थी। जैसे किसी आवारा सांड ने कोई हर भरा खेत अपने पैरों तले कुचल दिया हो। उसने बड़े प्यार से अपनी चूत पर अपने सीधे हाथ की उँगलियाँ रख दी और सहलाने लगा।

“भारती!!…..मेरी जान, क्या अभी भी तुम्हारी चूत में दर्द हो रहा है???” विवेक ने प्यार भरी आवाज में मुस्काकर पूछा

“…हाँ….तुमने मुझे चोदा ही इतनी बेदर्दी से है!!” मैंने रूठकर कहा

उसके बाद वो मेरे गाल पर किस करने लगा और मुझसे प्यार करने लगा। मैं मन ही मन उसकी वाइफ आरती से जलने लगी थी। कितनी किस्मत वाली औरत है विवेक कैसे हट्टे कट्टे आदमी का लम्बा लम्बा लंड रोज खाती होगी। सच में आरती कितनी किस्मत वाली है। मैं सोचने लगी। मेरे घर की इस छत पर मौसम बहुत अच्छा और अनुकूल था। ताज़ी हवा के झोके बार बार आते थे और मुझे और विवेक को आनंदित कर जाते थे। हम दोनों अभी भी नंगे थे, पूरी तरह से नंगे। मेरी मलाईदार चूत के दर्द को कम करने के लिए विवेक मेरी चूत को बार बार सहला रहा था। शाम को चलने वाली ठंडी हवा ने मेरा बाल उड़ रहे थे। विवेक बड़ी देर तक मेरी चूत अपनी उँगलियों से सहलाता रहा, कुछ देर मेरी बुर का दर्द कम हो गया।

अब रात को चुकी थी और ९ बज चुके थे। पर ना ही मेरा और ना ही वेवेक का यहाँ से जाने का मन कर रहा था। विवेक ने एक बार फिर से मेरे दूध पर अपने हाथ रख दिए और हम प्यार करने लगे। उसके जिस्म की खुशबू मुझे बहुत आकर्षित कर रही थी। विवेक एक असली मर्द था।

“विवेक….तुम बहुत हैंडसम हो!!” मैंने कहा तो वो हँसने लगा

“थैंक्स….” इस कॉम्प्लीमेंट के लिए

कुछ देर बाद हम दोनों का फिर से चुदाई का दिल करने लगा।

“मैं तुम्हारा मोटा ८ इंच का लौड़ा चूसूंगी!!” मैंने मुस्काकर कहा

“…..आओ” विवेक बोला

अब वो उस लम्बी सन बात वाली आराम वाली कुर्सी पर लेट गया और मैं उपर आ गयी। मैंने उनके मोटे और रसीले लंड को हाथ में पकड़ लिया और उपर नीचे करके फेटने लगी। मेरे काले घने बाल खुले थे, विवेक मेरे बालो में अपने हाथ फिराने लगा। मैंने उसके लिंग को मुंह में ले लिया और किसी लोलीपॉप की तरह चूसने लगी। सच में वो असली मर्द था। कुछ ही देर में मैं बहुत गर्म हो गयी और जोर जोर से विवेक का लंड चूसने लगी। मैं इस समय उसके साथ जबरदस्त मुख मैथुन कर रही थी, इसमें हम दोनों को मजा आ रहा था। “आआआआअह्हह्हह….” विवेक तेज तेज आवाज निकाल रहा था। हम दोनों मुख मैथुन का आनंद उठा रहे थे। मैंने आजतक ८ इंच का इतना बड़ा लिंग नही देखा था। सच में ये बहुत बड़ा लिंग था।



“भारती!!….मेरी जान…मेरी गोलियां भी चूसो!!” विवेक से फिर कहा

मैंने अपने मुंह से उसका लम्बा लिंग निकाला और फिर उसकी गोलियां मैं चूसने लगी। विवेक का चेहरा बता रहा था की उसको बहुत मजा मिल रहा है। उसका चेहरा ये बात बता रहा था। उनकी आँखे और पलकें काफी भारी हो गयी थी, जैसे उसे नींद आ रही हो। कुछ देर बाद उसने मुझे अपनी कमर पर बिठा लिया और मजे से चोदने लगा। कितनी ताजुब की बात थी की मेरी जरा सी चूत में उसका लंड पूरा अंदर धंस गया था। मैं उछल उछलकर उससे चुदवाने लगी।“……मम्मी…मम्मी….सी सी सी सी.. हा हा हा …..ऊऊऊ ….ऊँ..ऊँ…ऊँ…उनहूँ उनहूँ..” मैं बार बार कह रही थी।

मेरे पापा के ख़ास दोस्त और आरती के पति से मैं चुदवा रही थी। उसके मोटे ताजे लिंग का बड़ा आकार मैं अपनी चूत में साफ साफ़ महसूस कर सकती थी। डॉ लग रहा था की कहीं विवेक का मोटा लंड मेरे गर्भाशय में ना पहुच जाए। मैं अपनी आँखे बंद कर ली और मजे मजे चुदवाने लगी।

“ओह्ह्ह्ह….भारती! तुम कितनी खूबसूरत हो! मैंने तुम्हारे जैसी हसींन लड़की आजतक नही देखी!!” विवेक बोला

उसके हाथ मेरी रसीली मस्त गोल गोल बड़ी बड़ी छातियों पर जा पहुचे और उनको हाथ में भर लिया विवेक ने। मेरे दूध को हल्का हल्का मजा लेते हुए दबाने लगा, फिर मेरी निपल्स को वो अपने अंगूठे और तर्जनी से हल्का हल्का मसलने लगा। नीचे से वो मुझे बड़े प्यार से आराम आराम से चोदने लगा। क्यूंकि कुछ देर पहले उसने मुझे बहुत कसकर चोदा था। इसलिए मेरी दूसरी चुदाई विवेक बिना किसी जल्दबाजी के बहुत आराम से कर रहा था। वो आधे घंटे तक इसी तरह मुझे कमर पर बिठाकर मेरी चूत मारना रहा और मेरी चूचियों की निपल्स को वो अपने अंगूठे और तर्जनी से मसलता रहा। इसी बिच मैं २ बार झड गयी। फिर विवेक ने मेरी चूत में अपना माल गिरा दिया।

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