नेहा को माँ बनाया

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नेहा को माँ बनाया

एक रात मैं ओफ़िस से वापस आ रहा था तो एक कार मेरे पास आकर रुकी। उसमें एक 28 उम्र के आसपास की महिला थी। उसने मुझसे सेक्टर 58 का रास्ता पूछा तो मैंने कहा- मैं उसी तरफ़ जा रहा हूँ, अगर आपकि कोई परेशानी ना हो तो मुझे बैठा लें।

तो उसने मुझे अपनी गाड़ी में बिठा लिया। बातों-2 में पता चला कि वो अपनी सहेली के घर जा रही थी। फ़िर मैंने उसका नाम पूछा तो उसने अपना नाम नेहा बताया। उसने यह भी बताया कि वो नोएडा में नई है।

फिर मैंने उसके सामने दोस्ती का प्रस्ताव रखा तो वह मान गई। फिर हमने अपने नम्बर एक दूसरे को दिए। तब तक उसकी सहेली का घर आ गया और मैं वहीं उसे धन्यवाद बोल कर उतर गया।

फिर हमारी फोन पर बातें शुरू हुईं। तब उसने बतया कि वह अकेली रहती है और उसके पति ओफ़िस के काम से अधिकतर बाहर रहते हैं।

एक दिन उसका फोन आया। वो कुछ परेशान थी। उसने मुझे घर बुलाया अपने तो मैंने कहा- मैं शाम तक आ पाऊँगा।

शाम को जब मैं उसके घर पहुँचा तो वो मेरा ही इन्तजार कर रही थी।

जब मैंने उससे पूछा- क्या बात है, इतनी परेशान क्यों हो?

तो वो रोने लगी। उसकी अपने पति से कुछ कहासुनी हो गई थी। जब मैंने उसे चुप होने के लिये कहा और कहा- कहीं बाहर घूम कर आते हैं तो वो मुझसे लिपट गई। मैंने उससे कहा- यह क्या कर रही हो?तो वो बोली- मेरे पति मुझे खुश नहीं रख पाते।

मैं भी इतनी हसीन महिला को अपनी बाहों में पहली बार लेकर बहक गया। मैंने प्यार से उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिये।वो भी बहक सी गई थी। कुछ देर तो हुम लोग ऐसे ही चूमाचाटी करते रहे। कभी मैं उसके नीचे के होठों को चूसता तो कभी उपर के। कभी मैं उसके गालों को तो कभी गले को चूमता। उसके कोमल नर्म मुलायम होंठ मेरे हठीले होंठों के नीचे पिस रहे थे। वो तो बस उम्… उम्…. ही करती जा रही थी।

अब मेरा एक हाथ उसके स्तनों पर भी फिरने लगा था। अब मैं ज़रा सा नीचे होकर उसके उरोजों की घाटी में मुँह लगा कर उसे चूमने लगा। मेरे लिए यह किसी स्वर्गिक आनंद से कम नहीं था। फिर मैं अपना हाथ उसकी पीठ पर लाया और और कुर्ती के अन्दर हाथ डाल कर उसकी नर्म पीठ को सहलाने लगा। मुझे लगा यह तंग कुर्ती और चोली अब हमारे प्रेम में बाधक बन रही है तो मैंने नेहा से कुर्ती उतारने को कहा। तो उसने कहा- तुम खुद ही उतार दो।

फ़िर मैंने उसकी कुर्ती और लोअर उतार दी। उसकी जाँघों के बीच तो अब मात्र एक छोटी सी पेंटी और छाती पर ब्रा ही रह गई थी।

उसने मेरे भी कपड़े उतारने को कहा तो मैंने कहा- तुम खुद ही उतारो तो मुझे अच्छा लगेगा।

तो उसने अपने कोमल हाथों से मेरे कपड़े भी उतार दिये। मैं अब सिर्फ चड्डी में था। हम फिर एक दूसरे को चूमने लगे। कभी मैं उसके गले को चूमता तो कभी कान काट देता। वो भी ऐसा ही करती। उसकी बगलों से एक मादक गंध निकल आ रही थी जो मुझे सेक्स के लिए प्रेरित और आकर्षित कर रही थी।

फिर हमने अपने बचे हुए कपड़े उतार दिये। अब हम दोनों पूरे नंगे थे।

मैं लगातार नेहा को चूमे जा रहा था। कभी एक उरोज को मुँह में भर लेता और दूसरे को होले से मसलता और फिर दूसरे को मुँह में लेकर चूसने लग जाता। फिर होले होले मैंनीचे सरकने लगा। पहले उसकी नाभि को चूमा और फिर पेडू को। वो भी अब मेरी पीठ पर अपने नाखून मारने लगी थी जो हमें और उत्ते्जित कर रहे थे। उसकी गर्म साँसों का आभास पाते ही मेरा लण्ड और अकड़ गया। फिर हम 69 पोसीशन में आये। नेहा धीरे धीरे मेरा लंड चूसने लगी। मैं उसकी चूत को चाट रहा था। धीरे-धीरे उसका शरीर अकड़ने लगा तो मैं समझ गया कि वो झड़ने वाली थी।

मैं जोर-जोर से उसकी बुर के दाने को चाट रहा था, तभी एकदम से उसका माल निकला और और मैं सारा चाट गया।

फ़िर मैं अपने लंड को चूत के मुहाने पर लगा कर उसे चूमने लगा और दोनों हाथों से उसके स्तन दबाने लगा ताकि उसका ध्यान चुदाई जो शुरु होने वाली है, पर ना जाए और मौका देख मैंने एक झटका लगा दिया, जिससे थोड़ा अंदर गया तो सही पर लंड फिर बाहर आ गया। फिर भी मैंने दूसरी बार मैंने फिर से लंड को चूत के ऊपर रखा और जोर से चूमने लगा और लंबा, जोरदार झटका लगाया जिससे आधा लंड चूत में चला गया। उसकी चुदाई काफी कम हुई थी इसलिए चूत काफी तंग थी। ऐसा लग रहा था कि मैं स्वर्ग में पहुँच गया हूँ। मैंने उसके दर्द को कम करने के लिए

उसको अपनी बाहों में ले लिया और चूमने लगा। थोड़ी देर बाद उनका दर्द कम हुआ। वो अब आह्ह…… आह्ह……. करके चिल्लाने लगी। 10-12 धक्कों के बाद वो भी अपनी गांड ऊपर कर कर के चुदवाने लगी। मैंने भी अपने धक्कों की रफ़्तार बढ़ा दी। मेरा लण्ड खाकर उसे बहुत मजा आ रहा था और मुझे उनकी बुर में अपना लण्ड डालकर स्वर्ग का एहसास हो रहा था। अब करीब दस मिनट की चुदाई के बाद मैं झड़ने वाला था। अब मैं भी अपनी चरम सीमा पर पहुँच गया था, मैंने कहा- मैं झड़ने वाला हूँ नेहा। उसने कहा- मेरे अन्दर ही झड़ जाना ! मुझे माँ बना दो समीर ! मुझे माँ बना दो ! मैंने ऐसा ही किया और सारा वीर्य उनकी चूत में ही छोड़ दिया। ऐसा लग रहा था कि कोई ज्वालामुखी फट गया है। अब हम दोनों एक दूसरे के ऊपर लेट गये। उसकी आँखों से आंसू निकलने लगे। उसने मुझे धन्यवाद देते हूए कहा कि आज मैनें उसकी माँ बनने में मदद की और उसकी ज़िन्द्गी का सूनापन दूर किया। उसके बाद जब भी उसे चुदवाना होता था तो वो मुझे फ़ोन करके बुलाती और मैं नेहा की प्यास बुझाने पहुँच जाता।

इस तरह मैंने

नेहा को माँ बनाया